नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि खाड़ी क्षेत्र से अब तक 286 भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है, जिनमें पिछले 48 घंटों में 33 नाविकों की स्वदेश वापसी शामिल है। नौवहन महानिदेशालय यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (डीजी शिपिंग) ने यह सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के बयान के अनुसार, कंट्रोल रूम शुरू होने के बाद से अब तक नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों की सहायता के लिए 3,030 फोन कॉल और करीब 5,497 ईमेल प्राप्त हुए हैं।
पिछले 48 घंटों में ही 310 से ज्यादा कॉल और 597 ईमेल प्राप्त हुए, जिनमें मदद और जानकारी मांगी गई।
बयान में कहा गया है, “देश भर के प्रमुख बंदरगाह जहाजों की आवाजाही और कार्गो संचालन पर लगातार कड़ी नजर रख रहे हैं और शिपिंग कंपनियों तथा कार्गो से जुड़े हितधारकों को सहयोग दे रहे हैं। इसके तहत एंकरज (लंगरगाह), बर्थ किराया और स्टोरेज शुल्क में भी रियायतें दी जा रही हैं। बंदरगाह कस्टम और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर कार्गो संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए समन्वय कर रहे हैं।”
मंत्रालय ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय नाविक से जुड़ी कोई समुद्री घटना सामने नहीं आई है।
फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) ने मध्य पूर्व जाने वाले कंटेनरों के लिए अस्थायी ट्रांसशिपमेंट स्टोरेज की व्यवस्था की है। इसके साथ ही ग्राउंड रेंट और ड्वेल टाइम चार्ज में 100 प्रतिशत तक छूट दी गई है, जबकि रीफर कंटेनर प्लग-इन चार्ज में 15 दिन तक लगभग 80 प्रतिशत की छूट दी गई है।
बयान में आगे कहा गया है, “फिलहाल किसी भी बड़े बंदरगाह पर भीड़ की स्थिति नहीं है। जेएनपीए पर निर्यात के लिए तैयार कंटेनरों की संख्या करीब 5,600 से घटकर लगभग 3,900 रह गई है।”
इसके अलावा, बंदरगाह खाड़ी क्षेत्र की ओर जाने वाले जहाजों को सुरक्षित लंगरगाह भी उपलब्ध करा रहे हैं, जो खाड़ी देशों की ओर जा रहे हैं और फिलहाल आवागमन करने में असमर्थ हैं।
सरकार ने बताया कि संचालन से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए डीजी शिपिंग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया गया है, जिसमें कस्टम, बंदरगाह और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वह विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों, शिपिंग कंपनियों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार समन्वय करना जारी रखे हुए है।
–आईएएनएस
डीबीपी
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