मोरबी, 25 मई (आईएएनएस)। गुजरात के मोरबी जिले में एक पौधरोपण अभियान के तहत महज 37 दिनों में 10 लाख पौधे लगाए गए। इस अभियान ने मच्छू डैम के किनारे बंजर पड़ी जमीन को अब घनी हरी-भरी चादर में बदल दिया है।
‘नमो वन’ नाम की यह परियोजना मोरबी जिले में मच्छू बांध (2) के पास एक ट्रस्ट की 1,200 बीघा जमीन पर 2025 में विकसित की गई थी। इस वन क्षेत्र का उद्घाटन पिछले साल 17 सितंबर को पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था।
इस पहल का नेतृत्व करते हुए श्रम, कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने कहा कि कैंसर से ठीक होने के बाद मैं अपना बाकी जीवन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित करना चाहता हूं।
मोरबी से छह बार विधायक रहे और ट्रस्टी अमृतिया ने बताया कि यह पौधरोपण अभियान इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर एक पर्यावरण पहल शुरू करने के उद्देश्य से चलाया गया था। ट्रस्ट के पास लगभग 4,500 बीघा जमीन है।
इस परियोजना के बारे में बात करते हुए अमृतिया ने कहा कि सद्भावना वृद्धाश्रम की मदद से विस्तृत योजना बनाई गई थी, जो इस वृक्षारोपण अभियान से शुरुआती चरणों से ही जुड़ा हुआ था।
उन्होंने कहा कि जब हमने एक महीने के भीतर दस लाख पौधे लगाने का फैसला किया, तो हमने सद्भावना वृद्धाश्रम की मदद से विस्तृत योजना बनाई। जमीन बंजर थी, इसलिए सबसे पहले उसे समतल किया गया। बाहर से हजारों टन उपजाऊ मिट्टी लाई गई, बड़ी मात्रा में जैविक खाद मिलाई गई और पूरे क्षेत्र के चारों ओर बाड़ लगाई गई।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में लगभग 500 मजदूरों ने हिस्सा लिया और हर दिन 25,000 से 30,000 पौधे लगाए। 37 दिनों की लगातार मेहनत के बाद हमने 10 लाख पेड़ लगाए।
मंत्री ने बताया कि सिंचाई, खाद की आपूर्ति और लगाए गए पौधों के रखरखाव के लिए व्यवस्था की गई है, जिसका प्रबंधन अभी सद्भावना वृद्धाश्रम द्वारा किया जा रहा है।
हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दूसरी बार इस जगह का दौरा किया और वन क्षेत्र तक जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए तीन करोड़ मंजूर किए, ताकि आगंतुक आसानी से इस जगह तक पहुंच सकें।
64 वर्षीय अमृतिया ने कहा कि कैंसर के साथ उनकी हालिया लड़ाई ने पर्यावरण से जुड़े कामों के लिए उनके इरादों को और मजबूत किया है। हाल ही में उनकी सर्जरी हुई, उन्होंने कीमोथेरेपी के पांच राउंड पूरे किए और अभी इम्यूनोथेरेपी करवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अपनी कैंसर सर्जरी के बाद मुझे लगता है कि प्रकृति ने मुझे दूसरी जिंदगी दी है। अब मैं अपनी जिंदगी प्राकृतिक खेती और पेड़ लगाने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित करना चाहता हूं।
उन्होंने कहा कि सरकार से एक अनुरोध किया गया है कि मच्छू डैम के पास की सरकारी जमीन उन्हें आवंटित की जाए, ताकि भविष्य में भी इसी तरह के पेड़ लगाने के अभियान चला सकें।
–आईएएनएस
डीकेएम/वीसी
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