चेन्नई, 18 मार्च (आईएएनएस)। दक्षिणी पश्चिमी घाट में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील सेंगोत्ताई (आर्यनकावु) गैप से होकर गुजरने वाले एक प्रस्तावित हाईवे कॉरिडोर ने पर्यावरण संरक्षणवादियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह प्रोजेक्ट वन्यजीवों के एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर को बाधित कर सकता है और इस क्षेत्र में भूस्खलन के जोखिम को बढ़ा सकता है।
भारतमाला कार्यक्रम के अंतर्गत पुलियाराई-आर्यंकावु-कडमपट्टुकोनम आर्थिक गलियारे के हिस्से के रूप में बन रही इस परियोजना के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से वन्यजीव मंजूरी मांगी है।
इस कॉरिडोर का उद्देश्य तमिलनाडु और केरल तट के बीच माल ढुलाई की कनेक्टिविटी में सुधार करना है, जो एनएच-744 (कोल्लम-मदुरै) को एनएच-66 (मुंबई-कन्याकुमारी) से जोड़कर एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम परिवहन मार्ग का निर्माण करेगा।
यह परियोजना कुल 61.7 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है जिसमें सबसे संवेदनशील भाग को पैकेज-1 के रूप में चिह्नित किया गया है, जो केरल के तेनकासी जिले के पुलियाराई और कोल्लम जिले के एडामोन के बीच स्थित 23 किलोमीटर का क्षेत्र है। इसमें से 19 किलोमीटर केरल में और लगभग 4 किमी तमिलनाडु में पड़ता है।
इस विवाद के केंद्र में सेंगोट्टई (आर्यंकावु) दर्रा है, जो पश्चिमी घाट में एक दुर्लभ प्राकृतिक दर्रा है और राज्य की सीमाओं के पार वन आवासों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक मार्ग के रूप में कार्य करता है।
यह क्षेत्र अगस्त्यमलाई भूभाग का हिस्सा है, जो कलाकड़-मुंडनथुराई टाइगर रिजर्व, शेन्दुर्नी वन्यजीव अभयारण्य, पेरियार टाइगर रिजर्व और पेप्पारा व नेय्यर अभयारण्यों सहित प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों को जोड़ता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि पेरियार और शेन्दुर्नी के बीच का गलियारा बाघों व अन्य प्रजातियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है।
परियोजना दस्तावेजों से पता चलता है कि यह मार्ग तमिलनाडु के पुलियाराई आरक्षित वन और केरल के अरियानकावु और येरूर आरक्षित वनों से होकर गुजरेगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के निकट स्थित हैं।
दुर्गम भूभाग से निपटने के लिए योजना में चार लेन वाले राजमार्ग के लिए चार सुरंगों का प्रस्ताव है, जिनकी लंबाई 420 मीटर से लेकर 3.7 किलोमीटर से अधिक तक होगी। पर्यावरणविदों ने मंजूरी देने से पहले एक व्यापक पारिस्थितिक मूल्यांकन की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है।
–आईएएनएस
एसएके/पीएम
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



