चेन्नई, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले छह दिनों में तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया है, जिससे भीषण गर्मी से काफी राहत मिलेगी।
मौसम विभाग के अनुसार, 18 मार्च को तमिलनाडु और पुडुचेरी के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक होने की संभावना है। तमिलनाडु तट पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र आने वाले दिनों में मौसम के मिजाज को प्रभावित करेगा।
19 मार्च को डेल्टा जिलों और कराईकल क्षेत्र में एक या दो स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है, जबकि तमिलनाडु और पुडुचेरी के अधिकांश अन्य हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की उम्मीद है।
20 मार्च को भी इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान है, जिसके तहत दक्षिणी तमिलनाडु, डेल्टा क्षेत्रों और कराईकल में छिटपुट हल्की बारिश हो सकती है। 21 मार्च तक बारिश की गतिविधि पश्चिमी घाट और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों की ओर बढ़ने की संभावना है, जहां छिटपुट हल्की बारिश के साथ गरज-चमक भी हो सकती है।
दक्षिण के तटीय जिलों में भी कुछ समय के लिए बारिश हो सकती है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों और पुडुचेरी में शुष्क मौसम रहने की संभावना है। 23 मार्च को दक्षिणी तटीय जिलों के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का पूर्वानुमान है, जबकि अन्य जगहों पर शुष्क मौसम रहेगा।
हाल के दिनों में, कई जिलों में अचानक हुई बारिश ने भीषण गर्मी से काफी राहत दिलाई है। विरुधुनगर जिले में, शिवकाशी, तिरुथंगल, सत्तूर, पेरियापत्ती, चित्तूराजपुरम और मीनामपत्ती सहित कई इलाकों में एक घंटे से अधिक समय तक तीव्र आंधी-तूफान आया।
तिरुपत्तूर जिले के कलासपक्कम और पुदुकोविल क्षेत्रों के साथ-साथ वानीयमबाड़ी, अंबूर और येलागिरी पहाड़ियों में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई, जहां व्यापक वर्षा दर्ज की गई।
वहीं मदुरै में एक घंटे से अधिक समय तक गरज और बिजली के साथ भारी बारिश हुई, जिससे क्षेत्र में काफी ठंडक हो गई। भीषण गर्मी से जूझ रहे कोयंबटूर में भी रेस कोर्स, गांधीपुरम, उक्कडम, पेरूर, मदामपत्ती और कालामपलयम जैसे क्षेत्रों में व्यापक बारिश हुई।
थूथुकुडी और थेनी जिलों के कुछ हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई, जिसमें कोविलपट्टी, एट्टायपुरम, पेरियाकुलम और सोथुपराई बांध और कुंभकारई झरने के पास के इलाके शामिल हैं।
इसी बीच, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के धारवाड़ जिले में अचानक ओलावृष्टि हुई, जिससे सड़कें बर्फ जैसी परत से ढक गईं, और इससे दक्षिण भारत में असामान्य मौसम का पैटर्न और भी बढ़ गया।
–आईएएनएस
एसएके/एएस
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