गुजरात में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा 30 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी पार्क

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नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। भारत कच्छ के रण के विशाल नमक के मैदानों को दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में बदल रहा है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। गुजरात में लगभग 72,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला 30 गीगावाट (जीडब्ल्यू) का खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, जिसे गुजरात हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क भी कहा जाता है, एक विशाल सोलर और विंड प्रोजेक्ट है। इसके पूरा होने पर यह करीब 1.8 करोड़ घरों को बिजली देने में सक्षम होगा। यह प्रोजेक्ट अपने पैमाने के कारण खास है, जिसमें लगभग 20 गीगावाट…

नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। भारत कच्छ के रण के विशाल नमक के मैदानों को दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में बदल रहा है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।

गुजरात में लगभग 72,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला 30 गीगावाट (जीडब्ल्यू) का खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, जिसे गुजरात हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क भी कहा जाता है, एक विशाल सोलर और विंड प्रोजेक्ट है। इसके पूरा होने पर यह करीब 1.8 करोड़ घरों को बिजली देने में सक्षम होगा।

यह प्रोजेक्ट अपने पैमाने के कारण खास है, जिसमें लगभग 20 गीगावाट सोलर और 10 गीगावाट विंड एनर्जी शामिल हैं। इस हाइब्रिड मॉडल का उद्देश्य दिन में सोलर और रात में हवा से बिजली बनाकर लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

इस प्रोजेक्ट को कई सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर विकसित कर रही हैं, जिनमें अदाणी ग्रीन एनर्जी, एनटीपीसी, गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड और गुजरात इंडस्ट्रियल पावर कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। इसमें अदाणी ग्रीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा, करीब 9.5 गीगावाट, है।

सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को इस प्रोजेक्ट में विंड एनर्जी के लिए बड़ा हिस्सा दिया गया है।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। अभी तक इसमें 1 जीडब्ल्यू से ज्यादा क्षमता चालू हो चुकी है, और आने वाले वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन (नॉन-फॉसिल फ्यूल) क्षमता हासिल करने के भारत के लक्ष्य का अहम हिस्सा है। इसके जरिए बंजर जमीन को एक बड़े ऊर्जा केंद्र में बदला जा रहा है, जिससे रोजगार भी बढ़ेगा और कोयले पर निर्भरता कम होगी।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे कठिन कार्य परिस्थितियां, ऊर्जा स्टोरेज की कमी के कारण रिन्यूएबल ऊर्जा की अनियमितता और रेगिस्तानी पर्यावरण पर असर की चिंता।

इन चुनौतियों के बावजूद, खावड़ा प्रोजेक्ट भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो दिखाता है कि कम उपयोग वाली जमीन का उपयोग बड़े स्तर पर टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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