नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई।
भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।
भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई।
इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।
इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है।
एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है।
इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।
–आईएएनएस
एबीएस
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