जनसेना सांसद ने आंध्र प्रदेश के लिए दो नए एम्स की मांग उठाई, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा को लिखा पत्र

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अमरावती, 6 अगस्त (आईएएनएस)। जनसेना के राज्यसभा सांसद लिंगमनेनी रमेश ने आंध्र प्रदेश में दो नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्तर के संस्थानों की स्थापना की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। सांसद ने पत्र में रायलसीमा और उत्तर तटीय आंध्र (उत्तरांध्र) में एक-एक नए एम्स स्तर के संस्थान स्थापित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एम्स मंगलगिरि का विस्तार करते हुए वहां नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग, उन्नत शोध केंद्र स्थापित करने और संस्थान…

अमरावती, 6 अगस्त (आईएएनएस)। जनसेना के राज्यसभा सांसद लिंगमनेनी रमेश ने आंध्र प्रदेश में दो नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्तर के संस्थानों की स्थापना की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

सांसद ने पत्र में रायलसीमा और उत्तर तटीय आंध्र (उत्तरांध्र) में एक-एक नए एम्स स्तर के संस्थान स्थापित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एम्स मंगलगिरि का विस्तार करते हुए वहां नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग, उन्नत शोध केंद्र स्थापित करने और संस्थान की क्षमता बढ़ाने का भी आग्रह किया है।

रमेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद राज्य की स्वास्थ्य जरूरतों, विभिन्न क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं में असमानता और सभी क्षेत्रों के लोगों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह मांग की जा रही है।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत राज्य विभाजन के बाद एम्स मंगलगिरि की स्थापना की थी। यह संस्थान आज आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के लाखों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण तृतीयक चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान सेवाएं प्रदान कर रहा है।

सांसद ने कहा कि वर्ष 2015 में स्वीकृत एम्स मंगलगिरि ने लगातार अपनी शैक्षणिक और चिकित्सीय सेवाओं का विस्तार किया है, लेकिन करीब पांच करोड़ की आबादी और तीन प्रमुख क्षेत्रों तटीय आंध्र, रायलसीमा और उत्तरांध्र में फैले राज्य के लिए केवल एक एम्स पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में एम्स मंगलगिरि मुख्य रूप से मध्य तटीय क्षेत्र को सेवाएं देता है। रायलसीमा के मरीजों को उन्नत इलाज के लिए सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। वहीं उत्तर तटीय आंध्र के लोगों को भी कई बार विशाखापत्तनम या राज्य से बाहर विशेष उपचार के लिए जाना पड़ता है। हृदय रोग, ट्रॉमा, स्ट्रोक, अंग प्रत्यारोपण, बाल चिकित्सा सुपर स्पेशियलिटी, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसाइंस और क्रिटिकल केयर जैसी आपात स्थितियों में लंबी दूरी तय करना मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

रमेश ने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में एम्स स्तर के संस्थानों की स्थापना से लोगों को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद संस्थागत संसाधनों का पुनर्वितरण हुआ था और पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए राज्य में राष्ट्रीय स्तर के और संस्थानों की जरूरत है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि एक ही राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में एक से अधिक एम्स स्थापित किए जाने के उदाहरण पहले से मौजूद हैं। जम्मू-कश्मीर में विजयपुर (जम्मू) और अवंतीपोरा (कश्मीर) में दो एम्स स्वीकृत हैं, जबकि बिहार में पटना और दरभंगा में एम्स (निर्माणाधीन) हैं। इसी तर्ज पर भौगोलिक विस्तार, जनसंख्या और क्षेत्रीय स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए आंध्र प्रदेश में भी दो अतिरिक्त एम्स स्थापित किए जाने चाहिए।

–आईएएनएस

डीएससी

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