जम्मू, 14 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने सोमवार को पुंछ जिले में चल रहे आतंकवाद-विरोधी अभियानों की समीक्षा की।
डीजीपी ने जिले में चल रहे ऑपरेशन और वहां की सुरक्षा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उनके साथ जम्मू जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) तेजिंदर सिंह भी थे।
एक अधिकारी ने कहा, “डीजीपी को ताजा घटनाक्रम, ऑपरेशन की तैयारी और जमीन पर अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल के बारे में जानकारी दी गई। हाल ही में घुसपैठ की कोशिशों और पीर पंजाल इलाके में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों की गतिविधियों को देखते हुए यह दौरा अहम है।”
हाल ही में, स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने पुंछ (और उधमपुर) के मंडी और सुरनकोट इलाकों में कई छापे मारे। इन छापों का मकसद कट्टरपंथ फैलाने वाले और सीमा पार बातचीत करने वाले नेटवर्क को निशाना बनाना था।
एसआईए को ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चला कि कई स्थानीय लोग लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के उस पार बैठे हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। आरोप है कि इन जरियों का इस्तेमाल अलगाववादी सोच फैलाने और ऑनलाइन कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था।
सितंबर की शुरुआत में, सीमा पर तैनात सैनिकों ने बालाकोट सेक्टर (मेंढर) में डब्बी गांव के पास एलओसी पार करने की कोशिश कर रहे आतंकवादियों के एक समूह को देखा। इसके बाद दोनों तरफ से जबरदस्त गोलीबारी हुई, जिसके बाद स्थानीय जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।
धारा सांगला, भाटादुरियन और खेरोवाली ढोक जैसे दूर-दराज के जंगली इलाकों में बड़े पैमाने पर घेराबंदी और तलाशी अभियान (सीएएसओ) जारी हैं। ये अभियान तकनीकी खुफिया जानकारी और पीर पंजाल सुरंग जैसी अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पास संदिग्ध गतिविधियों के बारे में स्थानीय लोगों की जानकारी के आधार पर शुरू किए गए थे।
पुंछ जिले में आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन का मौजूदा स्वरूप उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षाओं और खुफिया जानकारी पर आधारित छापों से तय हो रहा है। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और खास केंद्रीय एजेंसियों वाले संयुक्त सुरक्षा ग्रिड ने सीमा पार घुसपैठ को रोकने और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए उपाय तेज कर दिए हैं।
–आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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