बेंगलुरु, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को केंद्र पर सीबीआई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों के माध्यम से राज्य में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। साथ ही, स्टिंग ऑपरेशन करने का भी आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की रणनीति भाजपा की मानक संचालन प्रक्रिया का हिस्सा है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस के नेताओं, विधायकों और मंत्रियों को स्टिंग ऑपरेशन के जरिए निशाना बनाए जाने का डर है, तो प्रियांक खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार कर्नाटक सरकार को हटाने के लिए बेताब है क्योंकि राज्य में भाजपा का नेतृत्व अक्षम और अप्रभावी है।
राज्य के मंत्रियों को निशाना बनाकर संभावित स्टिंग ऑपरेशन का मुद्दा तब सामने आया जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कैबिनेट बैठक में आशंका व्यक्त की कि भाजपा और जेडी (एस) मंत्रियों को निशाना बना सकते हैं और उनके खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन कर सकते हैं।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र और गोवा में भी इसी तरह की रणनीति अपनाई है लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न तो वह और न ही उनके सहयोगी किसी भी गलत काम के दोषी हैं या ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं।
एसआईआर और फॉर्म-7 आवेदनों के कथित दुरुपयोग से जुड़े विवाद पर, खड़गे ने कहा कि जवाबदेही की मांग केवल कांग्रेस पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश के लोगों द्वारा साझा की जाती है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता फर्जी फॉर्म-7 आवेदन जमा कर जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित करके मतदाताओं के नाम हटाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अधिकारियों से संपर्क कर अपनी जीवित होने की पुष्टि की है और दोषियों के खिलाफ मामले दर्ज करने की मांग की है।
प्रियांक खड़गे ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष को विस्थापन नोटिस दिए जाने की खबरों का भी जिक्र किया और कहा कि एसआईआर अभ्यास ने राजनीतिक नेताओं और जन प्रतिनिधियों के बीच भी चिंताएं पैदा कर दी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल केंद्र में सत्ताधारी दल को बचाने के लिए किया जा रहा है और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
प्रियांक खड़गे ने पूछा कि वे मीडिया को संबोधित क्यों नहीं कर रहे हैं और चुनावी पुनरीक्षण प्रक्रिया के बारे में सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने पहले कांग्रेस की आलोचना करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और अब उन्हें एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
प्रियांक खड़गे ने आरोप लगाया कि संशोधन प्रक्रिया प्रकृति में बहिष्करणकारी थी और सवाल उठाया कि मतदाताओं के नाम, मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) संख्या, पते और प्रस्तावित विलोपन के कारणों वाले पूर्व-मुद्रित फॉर्म-7 आवेदन पूरे देश में कैसे तैयार किए जा रहे थे।
प्रियांक खड़गे ने यह भी बताया कि फॉर्म-7 जमा करने वाले आवेदकों को यह घोषित करना होता है कि दी गई जानकारी सत्य है और यदि घोषणा झूठी पाई जाती है तो उन्हें एक वर्ष तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित तौर पर गलत जानकारी जमा करने के लिए जवाबदेही की मांग की।
भाजपा द्वारा बार-बार लगाए जा रहे उन आरोपों का जवाब देते हुए कि कांग्रेस गलत सूचना फैला रही है, प्रियांक खड़गे ने सवाल किया कि पार्टी चुनाव आयोग को सीधे जवाब देने का मौका देने के बजाय उसका बचाव क्यों कर रही है।
–आईएएनएस
एसएके/पीएम
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