नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को स्पष्ट किया कि प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने इस संबंध में चल रही अटकलों को खारिज करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से देश से माफी मांगने की मांग की।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू विपक्ष का रुख जानना चाहते थे। यह अफवाह फैलाई जा रही है कि परिसीमन के मुद्दे पर बातचीत हुई और कांग्रेस ने बाद में जवाब देने की बात कही, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले संसद सत्र में पार्टी ने जो रुख अपनाया था, वही आज भी कायम है और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
सरकार द्वारा परिसीमन विधेयक लाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की खबरों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि विशेष सत्र बुलाने का उद्देश्य क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति परिसीमन विधेयक लाने वाला है, वह सामने आने के बजाय छिप रहा है और संसद में आने का साहस भी नहीं दिखा रहा। उन्होंने यह भी पूछा कि “फायरिंग का आदेश किसने दिया?”
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर वेणुगोपाल ने कहा कि पहले सरकार विधेयक पेश करे, उसके बाद कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करेगी।
उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर संसद में विपक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेता लोकसभा अध्यक्ष से मिले। उनका आरोप है कि अध्यक्ष के निर्देश पर रिजिजू ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और पूरे विपक्ष के खिलाफ कई टिप्पणियां कीं, जो पूरी तरह असंसदीय थीं और उन्हें कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की गलतियों पर पर्दा डालने और असत्य बातें कहने के लिए किरेन रिजिजू को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि जो लोग राम मंदिर को लूटने के आरोपों का सामना कर रहे हैं, वही अब कांग्रेस को ‘राम विरोधी’ बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों पर लोग हंसेंगे। कांग्रेस केवल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, जिन्होंने राम मंदिर के चंदे में कथित तौर पर गड़बड़ी की, लेकिन सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
–आईएएनएस
डीएससी
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