कोच्चि, 14 सितंबर (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को मुंबई में चार चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद विधायक मणि सी. कप्पन की अयोग्यता की मांग वाली याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया। न्यायालय ने यह सवाल उठाया कि क्या सजा के निलंबन का उनकी अयोग्यता पर कोई असर पड़ेगा।
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से पूछाः “यदि सजा निलंबित कर दी जाती है तो इसका क्या प्रभाव होगा? क्या दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाएगी? यदि दोषसिद्धि निलंबित कर दी जाती है तो क्या अयोग्यता भी लागू नहीं होगी?”
अदालत ने कारोबारी दिनेश मेनन द्वारा दायर याचिका पर विशेष दूत के माध्यम से कप्पन को नोटिस जारी किया है, जिसमें स्पीकर को पाला विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करने और भारत निर्वाचन आयोग को उपचुनाव शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
केरल सरकार और अध्यक्ष की ओर से सरकारी वकील ने संज्ञान लिया जबकि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से स्थायी वकील ने संज्ञान लिया। अदालत ने उन्हें निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया और मामले पर आगे विचार करने के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की।
मुंबई के बोरीवली स्थित अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 1 सितंबर को मेनन द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत दायर शिकायतों में कप्पन को चार मामलों में दोषी ठहराया था।
एक मामले में कप्पन को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई और मुआवजे के तौर पर 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया, जिसमें भुगतान न करने पर सजा का प्रावधान है।
दो अन्य मामलों में, उन्हें प्रत्येक मामले में एक-एक साल की सजा सुनाई गई और प्रत्येक मामले में 1.70 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
चौथे मामले में, उन्हें छह महीने की सजा सुनाई गई और 70 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया। चारों मामलों में कुल सजा साढ़े तीन साल की है।
इससे पहले मेनन ने स्पीकर से संपर्क कर कप्पन को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी।
कोट्टायम जिले की पाला सीट कप्पन और मणि परिवारों के बीच गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए जाना जाता है, जिसने तीन दशकों से अधिक समय से पाला की राजनीति को आकार दिया है।
2006 से तत्कालीन वामपंथी उम्मीदवार कप्पन ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ उम्मीदवार केएम मणि के खिलाफ लगातार तीन विधानसभा चुनाव लड़े और तीनों बार हार गए।
मणि की मृत्यु के बाद 2019 में हुए उपचुनाव में कप्पन ने अंततः पाला में अपनी पहली जीत हासिल की, जिसमें उन्होंने केरल कांग्रेस-मणि के उम्मीदवार को हराकर केरल कांग्रेस के दिग्गज नेता के इस निर्वाचन क्षेत्र पर 52 वर्षों के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया।
2021 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में नाटकीय बदलाव आया। जोस मणि ने केरल कांग्रेस-मणि पार्टी को सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे में शामिल कर लिया, जबकि कप्पन कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में चले गए। 2021 के चुनाव में कप्पन ने जोस मणि को हराकर पाला की सीट बरकरार रखी।
यह प्रतिद्वंद्विता 2026 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रही, जब कप्पन ने एक बार फिर जोस मणि को हराकर पाला सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। जोस मणि ने कथित तौर पर पाला की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए कप्पन की कड़ी आलोचना की है। कप्पन ने कहा है कि वह दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करेंगे और उन्होंने मेनन को पैसे देने से इनकार किया है।
–आईएएनएस
एसएके/पीएम
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