मलप्पुरम, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के वालपराई में हुए भीषण सड़क हादसे में नौ लोगों की जान चली गई, जिससे पेरिंथलमन्ना का एक पूरा गांव और एक स्कूल सदमे में है।
जब मृतकों के शव उनके गृह नगर लाए गए तो हजारों की संख्या में लोग नम आंखों के साथ अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित हुए।
पीड़ितों के शव लेकर एम्बुलेंस सुबह करीब 9:15 बजे पांग अंबलप्पारंबा सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंची। इससे पहले तड़के पोल्लाची में सभी शवों का पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया था।
स्कूल परिसर में पहले से ही छात्रों, सहकर्मियों और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ जमा थी, जो इस अपूरणीय क्षति को स्वीकार करने की कोशिश कर रही थी। शवों को उनके घर ले जाने से पहले लगभग एक घंटे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।
इस त्रासदी का सबसे गहरा असर पांग के शैक्षिक समुदाय पर पड़ा है। स्थानीय स्कूल के आठ शिक्षकों में से पांच की इस हादसे में मृत्यु हो गई, जिनमें प्रधानाध्यापिका पी. अजिता और शिक्षक अब्दुल मजीद भी शामिल हैं।
इस घटना ने पूरे स्कूल को भीतर तक झकझोर दिया है। कभी एकजुट रहने वाला स्टाफ अब केवल चार सदस्यों तक सिमट गया है, जिससे स्कूल एक तरह से ‘अनाथ’ हो गया है।
दरअसल, यह हादसा उस समय हुआ जब पांग पल्लीप्पारंबा सरकारी एलपी स्कूल के 13 सदस्यों का समूह मनोरंजक यात्रा पर निकला था।
शुक्रवार की शाम को अथिरप्पिल्ली और वालपराई घूमने के बाद शाम करीब 5:15 बजे घाट रोड के 13वें हेयरपिन मोड़ पर वाहन चालक का नियंत्रण खो गया। वाहन पलटते हुए लगभग 500 फीट गहरी खाई में जा गिरा।
इस हादसे में सात महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल नौ लोगों की मौत हो गई। कुछ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कुछ ने अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। चार अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें से मोहम्मद फैज और नौशाद अली को कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
घटना के बाद राज्य के मंत्री वी. शिवनकुट्टी, पी.के. कुन्हालीकुट्टी और पनक्कड़ सादिक अली शिहाब थंगल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने स्कूल का दौरा कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
सरकार ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने, पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और प्रभावित छात्रों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था करने की घोषणा की है। साथ ही, अगले शैक्षणिक सत्र से पहले नए शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी।
जैसे-जैसे पांग क्षेत्र शोक की लहर में डूबा हुआ है, उन लोगों की अनुपस्थिति गहराई से महसूस की जा रही है, जिन्होंने कभी कक्षाओं और घरों को जीवंत बनाया था। खुशी से शुरू हुई यह यात्रा एक अकल्पनीय त्रासदी में बदल गई, जो अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ गई है जो अंतिम प्रार्थनाओं के बाद भी लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
–आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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