विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है: हुसैन दलवई

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मुंबई, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने लोकसभा में संविधान के 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर खुशी जाहिर की। मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में दलवई ने कहा कि सभी को इसका स्वागत करना चाहिए। कांग्रेस नेता दलवई ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का मुद्दा केवल बहाना था। असल मकसद परिसीमन (डिलिमिटेशन) करना था। अगर सरकार महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है तो यह जाति जनगणना के बिना संभव नहीं है। आरक्षण कैसे दिया जाएगा, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को पहले से पता था कि विधेयक पास नहीं होगा।…

मुंबई, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने लोकसभा में संविधान के 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर खुशी जाहिर की। मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में दलवई ने कहा कि सभी को इसका स्वागत करना चाहिए।

कांग्रेस नेता दलवई ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का मुद्दा केवल बहाना था। असल मकसद परिसीमन (डिलिमिटेशन) करना था। अगर सरकार महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है तो यह जाति जनगणना के बिना संभव नहीं है। आरक्षण कैसे दिया जाएगा, यह स्पष्ट होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को पहले से पता था कि विधेयक पास नहीं होगा। अब वे प्रचार करेंगे कि विपक्ष महिलाओं के खिलाफ है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। दलवई ने याद दिलाया कि महिलाओं को आरक्षण देने का काम सबसे पहले राजीव गांधी ने शुरू किया था। विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि यह बिल नाकामयाब हुआ है, यह अच्छी बात है क्योंकि सरकार महिलाओं को पूरा अधिकार देने के लिए तैयार नहीं है। आरएसएस की शाखाओं में महिलाएं नहीं जातीं। 1925 से चले आ रहे इस संगठन का प्रमुख आज तक कोई महिला नहीं बनी। उनके सभी संगठन पुरुष चलाते हैं और महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले संगठनों को वे महत्व नहीं देते।

एक आईटी कंपनी में यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के मामले पर कांग्रेस नेता ने कहा कि जांच चल रही है, सच सामने आ जाएगा। जो हुआ है वह गलत है और इसका कोई समर्थन नहीं करेगा। धर्म के नाम पर यौन शोषण करना पूरी तरह गलत है। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। केवल मुसलमान के नाम पर यह मुद्दा नहीं उठाया जाना चाहिए। मुस्लिम हो या हिंदू, महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

महाराष्ट्र में शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा कि पहली कक्षा से मराठी सिखाना गलत नहीं है, लेकिन पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि हिंदी पांचवीं कक्षा से सिखाई जाए, ताकि छात्रों पर पहली कक्षा से ही बोझ न पड़े।

राहुल गांधी पर लगे दोहरी नागरिकता के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सरकार राहुल गांधी से इतनी डरी हुई है कि पूछो मत। राहुल गांधी ओबीसी, दलितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे उठाते हैं, यात्राएं करते हैं और लोगों के बीच जाते हैं। इससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। सरकार हमेशा डरी रहती है और सोचती है कि एक व्यक्ति को कैसे परेशान किया जाए। इस मामले में कुछ भी नहीं है।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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