कोच्चि, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को चार लोगों को सुनाई गई सजा पर रोक लगा दी। इन चारों लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता एम. गीतानंदन का भी नाम शामिल है। वहीं, कोर्ट ने सभी को 36 हजार रुपये जमा करने का भी आदेश दिया है। यह पूरा मामला 2003 के मुथांगा भूमि विवाद से जुड़ा है।
जस्टिस ए. बदरुद्दीन की अदालत ने सजा पर रोक लगाई। दरअसल, अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने याचिका दाखिल की थी। हालांकि, यह रोक तत्कालिक है। इस अपील पर आगे चलकर विस्तृत सुनवाई होगी।
इससे पहले, हाईकोर्ट ने मौखिक तौर पर वायनाड सेशन कोर्ट की ओर से निष्कर्षों को दर्ज करने के तरीके पर चिंता जाहिर की थी। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि फैसले की समीक्षा होनी चाहिए। कोर्ट की ओर से संकेत दिया गया कि ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों में खामियां साफ जाहिर हो रही हैं।
अपील करने वालों में गीतानंदन, बीनू, रामेसन और अनिल कुमार सहित 57 लोगों के नाम शामिल हैं। मुथांगा भूमि संघर्ष के दौरान भड़की हिंसा में इन लोगों के खिलाफ मुकदमा चला था।
इससे पहले 31 जुलाई 2026 को वायनाड जिला प्रधान सत्र न्यायालय ने चार आरोपियों को कई मामलों में दोषी ठहराया था। इसमें गैर कानूनी सभा, दंगा, गलत तरीके से रोकना, जानबूझकर चोट पहुंचाना, सरकारी कर्मचारियों को गंभीर रूप से चोटिल करना, धमकी, अपहरण, खतरनाक हथियारों से किसी को चोट पहुंचाना और यहां तक कि हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे।
अदालत की ओर से इन सभी लोगों को पांच साल की कठोर कारावास और 36 हजार रुपये का जुर्माना देने का आदेश दिया गया।
अभियोजन के दौरान कई तरह के आरोप लगे, जिसमें एक यह था कि आरोपी ने वरिष्ठ सिविल पुलिस अधिकारी अब्दुल सलाम को मारने की कोशिश की थी और फोरेस्ट रेंज ऑफिसर पी.के. ससिधरन का अपहरण करने की कोशिश की थी।
मुथंगा हिंसा 19 फरवरी 2023 को देखने को मिला था। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारी आदिवासियों को वहां से हटाने के लिए कार्रवाई की शुरुआत की थी, जिन्होंने गोत्र महासभा के बैनर तले मुथांगा वन्यजीव अभयारण्य के अंदर की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया था।
इसके बाद यह पूरा अभियान हिंसात्मक हो गया। जिसके बाद पुलिस को कथित तौर पर 18 राउंड फायरिंग करनी पड़ी। इस फायरिंग की चपेट में आकर दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई जबकि आगे चलकर मृतकों की संख्या में भी इजाफा देखने को मिला। झड़पों के दौरान पुलिस कांस्टेबल के.वी. विनोद की भी मौत हो गई थी।
मुथंगा आंदोलन की शुरुआत आदिवासी कार्यकर्ता सीके जानू के नेतृत्व में हुई थी। उन्होंने आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए जमीन से जुड़े अधिकारों की मांग की थी। इसके बाद केरल के इतिहास में यह सबसे हिंसात्मक जनजातीय संघर्ष की कहानी बन गया।
अब हाईकोर्ट की ओर से सजा पर रोक लगाने के बाद एक बार फिर से पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा होगी। अब चारों अपीलकर्ताओं के भाग्य का फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद ही संभव हो पाएगा।
–आईएएनएस
एसएचके/पीएम
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