प्रधानमंत्री टीबीमुक्त भारत अभियान में पश्चिम बंगाल का नदिया जिला अव्वल, 98 ग्राम पंचायतें बनीं टीबीमुक्त

Summary :

कोलकाता, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले ने ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत तपेदिक (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम में सभी जिलों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया है। नदिया जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जिले की कुल 185 ग्राम पंचायतों में से 15 ग्राम पंचायतों में पिछले तीन वर्षों के दौरान टीबी का एक भी मामला सामने नहीं आया है। टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत इसे ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है। इसी तरह, नदिया जिले की 33 ग्राम पंचायतों में पिछले दो वर्षों में टीबी का कोई मामला नहीं मिला है, जिसे इसी राष्ट्रीय…

कोलकाता, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले ने ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत तपेदिक (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम में सभी जिलों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया है।

नदिया जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जिले की कुल 185 ग्राम पंचायतों में से 15 ग्राम पंचायतों में पिछले तीन वर्षों के दौरान टीबी का एक भी मामला सामने नहीं आया है। टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत इसे ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है। इसी तरह, नदिया जिले की 33 ग्राम पंचायतों में पिछले दो वर्षों में टीबी का कोई मामला नहीं मिला है, जिसे इसी राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत ‘सिल्वर स्टैंडर्ड’ माना जाता है।

इसके अलावा, नदिया जिले की 50 ग्राम पंचायतों में पिछले एक साल के दौरान टीबी का एक भी मामला सामने नहीं आया है, जिसे राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुसार ‘ब्रॉन्ज स्टैंडर्ड’ माना जाता है। इसका मतलब यह है कि वर्तमान में नदिया जिले की 185 में से कुल 98 ग्राम पंचायतें टीबी-मुक्त हैं।

नदिया के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. श्रीकांत पल्ली के अनुसार, यह सफलता टीबी की पहचान, नियमित इलाज, निगरानी और जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “लगभग 20 साल पहले, नदिया जिले में टीबी के मरीजों की संख्या आज की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक थी। अब स्थिति पूरी तरह से बेहतर हो गई है।”

उनके अनुसार, टीबी के इलाज में लंबा समय लगता है और बीमारी की गंभीरता के आधार पर इलाज की अवधि 6 से 18 महीने तक हो सकती है।

उन्होंने बताया, “पहले यह देखा गया था कि इलाज शुरू होने के बाद लोग अक्सर खांसी में शुरुआती राहत मिलने और संक्रमण का स्तर कम होने पर बीच में ही दवा लेना बंद कर देते थे। इस आदत की वजह से ‘ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी’ (दवाओं के प्रति प्रतिरोधी टीबी) का खतरा बढ़ जाता था, जिसका इलाज करना और भी मुश्किल हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि, इसलिए पिछले कुछ वर्षों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि मरीज इलाज की पूरी प्रक्रिया से गुजरें और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार तय समय तक अपनी दवाएं लेना जारी रखें।

पल्ली ने आगे बताया, “फिलहाल, अकेले नदिया जिले में ही लगभग 350 स्वयंसेवक ‘निक्षय मित्र’ के रूप में जुड़े हुए हैं। उनकी जिम्मेदारी प्रभावित लोगों को इलाज और पोषण (न्यूट्रिशन) के मामले में मदद करना है।”

–आईएएनएस

एएसएच/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.