नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने बुधवार को घोषणा की कि उसने महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की बीपीओ यूनिट में महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं की विस्तृत जांच करने के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (तथ्य-खोज समिति) का गठन किया है। यह कमेटी 10 कामकाजी दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कमेटी 17 अप्रैल को घटना स्थल का दौरा करेगी। इस कमेटी में बॉम्बे हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व डीजीपी बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और एनसीडब्ल्यू की सीनियर कोऑर्डिनेटर लीलाबाती शामिल हैं।
बयान में बताया गया है कि समिति को नासिक स्थित टीसीएस केंद्र और अन्य संबंधित स्थानों पर मौके पर जाकर जांच करने का काम सौंपा गया है; साथ ही, घटना के कारणों की जांच करना, संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का आकलन करना और सबूत जुटाने के लिए पीड़ितों, पुलिस अधिकारियों, कंपनी प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत करना भी इसके दायरे में शामिल है।
बयान के अनुसार, इसके अलावा समिति यदि कोई चूक हुई है तो उसकी पहचान करेगी, दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी, और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सुधारात्मक उपायों का सुझाव देगी।
यह समिति एनसीडब्ल्यू अधिनियम, 1990 की धारा 10(1) और धारा 10(4) के प्रावधानों के अनुसार काम करेगी, और इसे 10 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी। जांच पूरी होने पर समिति अपने निष्कर्ष आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करेगी।
एनसीडब्ल्यू ने कहा कि उसने नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की बीपीओ यूनिट में महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है।
एनसीडब्ल्यू के बयान में कहा गया है, “रिपोर्ट्स से पता चलता है कि धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़ी एक शिकायत के आधार पर शुरू की गई शुरुआती जांच में कुछ ऐसी परेशान करने वाली बातें सामने आई हैं, जिनमें सुपरवाइजरी पदों पर बैठे कुछ लोगों द्वारा महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन की कोशिशों के आरोप शामिल हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने ‘राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990’ की धारा 8 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, इस घटना की विस्तृत जांच करने के लिए एक ‘तथ्य-खोज समिति’ (फैक्ट फाइंडिंग कमेटी) का गठन किया है।
बयान में आगे कहा गया है कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, और समिति के निष्कर्षों के आधार पर सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
–आईएएनएस
एमएस/
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