तमिलनाडु : नीलगिरि का बाघ घोषित हुआ ‘आदमखोर’, पकड़ने के लिए अभियान तेज

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नीलगिरी, 23 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु वन विभाग ने गुडलूर के पास ओ-वैली टाउन पंचायत के लॉरिस्टन में दो लोगों की जान लेने वाले एक नर बाघ को आधिकारिक तौर पर ‘आदमखोर’ घोषित कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इस बात के पक्के सबूत मिले कि बाघ ने अपने शिकार के शरीर के कुछ हिस्सों को खाया है। वन विभाग अब इस 8 से 10 साल के बाघ को पकड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। बाघ ने हाल ही में दो स्थानीय निवासियों की जान ली है। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे के. रविकुमार का…

नीलगिरी, 23 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु वन विभाग ने गुडलूर के पास ओ-वैली टाउन पंचायत के लॉरिस्टन में दो लोगों की जान लेने वाले एक नर बाघ को आधिकारिक तौर पर ‘आदमखोर’ घोषित कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इस बात के पक्के सबूत मिले कि बाघ ने अपने शिकार के शरीर के कुछ हिस्सों को खाया है। वन विभाग अब इस 8 से 10 साल के बाघ को पकड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।

बाघ ने हाल ही में दो स्थानीय निवासियों की जान ली है। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे के. रविकुमार का शव उनके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर बरामद किया गया। वहीं, इससे पहले 9 अगस्त को लॉरिस्टन एस्टेट के फील्ड 4 में एम. बालकृष्णन (58 वर्ष) का आधा खाया हुआ शव मिला था।

गुडलूर के जिला वन अधिकारी पी. देवराज ने बताया कि शवों पर चोट के निशान और शरीर के अंगों को खाए जाने के कारण इसे आदमखोर माना गया है। दोनों जगहों से मिले बाघ के पंजों के निशान (पगमार्क) भी एक जैसे हैं, जिससे साबित होता है कि दोनों हमले इसी बाघ ने किए हैं।

वन विभाग ने बाघ को सुरक्षित पकड़ने के लिए खास इंतजाम किए हैं। बाघ के गुजरने वाले संभावित रास्तों पर जिंदा चारे वाले 6 पिंजरे लगाए गए हैं। 4 विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इनमें से 7-7 सदस्यों वाली दो टीमें पंजों के निशान और मल के जरिए जमीन पर बाघ की तलाश कर रही हैं, जबकि दो अन्य टीमें ड्रोन की मदद से निगरानी कर रही हैं।

जमीनी टीमों को हथियार और सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। विभाग की पहली कोशिश बाघ को ट्रेंकुलाइजर (बेहोशी का इंजेक्शन) देकर पकड़ने की है। हालांकि, अगर बाघ हमला करता है और इंसानी जान को खतरा होता है, तो अंतिम विकल्प के तौर पर उसे गोली भी मारी जा सकती है।

कैमरा-ट्रैप तस्वीरों से अभी बाघ की सेहत का सही अंदाजा नहीं लग पाया है। पकड़े जाने के बाद ही पशु चिकित्सक इसकी सही जांच कर पाएंगे। इसके बाद चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन राकेश कुमार डोगरा की मंजूरी से बाघ को वंडालूर के अरिग्नार अन्ना जूलॉजिकल पार्क या सिरुमुगाई के वन्यजीव उपचार केंद्र भेजा जाएगा।

सुरक्षा के मद्देनजर, एस्टेट प्रबंधन से प्रभावित इलाकों में कुछ और दिनों तक काम रोकने को कहा गया है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे रात में घरों के अंदर ही रहें और जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, तब तक बागानों या जंगली इलाकों की तरफ बिल्कुल न जाएं।

–आईएएनएस

वीकेयू/एएस

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IANS Agency

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