देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं, उपभोक्ताओं की भीड़ से बढ़ी घबराहट: सरकारी अधिकारी

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नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने कहा है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति की सूचना नहीं मिली है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एंड ऑयल रिफाइनिंग) सुजाता शर्मा ने गुरुवार को यह जानकारी दी। देश में एलपीजी की मौजूदा स्थिति पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की बुकिंग बढ़ गई है, क्योंकि कुछ उपभोक्ता संभावित सप्लाई बाधा की आशंका से जल्दबाजी में बुकिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बढ़ी हुई मांग असली कमी के…

नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने कहा है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति की सूचना नहीं मिली है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एंड ऑयल रिफाइनिंग) सुजाता शर्मा ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

देश में एलपीजी की मौजूदा स्थिति पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की बुकिंग बढ़ गई है, क्योंकि कुछ उपभोक्ता संभावित सप्लाई बाधा की आशंका से जल्दबाजी में बुकिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बढ़ी हुई मांग असली कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की घबराहट के कारण है।

शर्मा ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) फिलहाल व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद है, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद भारत के करीब 70 प्रतिशत तेल आयात अब अन्य मार्गों से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की उपलब्धता के मामले में भारत की स्थिति काफी आरामदायक है।

उन्होंने बताया कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है ताकि जरूरी सेवाओं पर कोई असर न पड़े।

इस बीच पर्यावरण मंत्रालय ने करीब एक महीने के लिए बायोमास, केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की सलाह दी है। यह सलाह इसलिए दी गई है ताकि एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सके और ऊर्जा की उपलब्धता बनी रहे।

भारत में हर दिन करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। सरकार के अनुसार, देश ने पहले ही उतनी मात्रा में तेल की सप्लाई सुरक्षित कर ली है, जितनी आमतौर पर इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आती थी।

शर्मा के मुताबिक, फिलहाल भारत के लगभग 70 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात वैकल्पिक मार्गों से हो रहा है, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यह आंकड़ा करीब 55 प्रतिशत था।

उन्होंने बताया कि भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 2006-07 में यह संख्या 27 थी। पिछले कई वर्षों की नीतियों के कारण आयात स्रोतों में यह विविधता आई है, जिससे भारत के पास कई विकल्प मौजूद हैं।

सरकार के अनुसार, देश की रिफाइनरियां इस समय उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, और कई मामलों में 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर भी संचालन किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल रही है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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