नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों से पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल ने सरकारी एजेंसियों, ईवीएम, चुनाव आयोग, मीडिया के बाद अब न्यायपालिका को टारगेट किया है, जो भारतीय लोकतंत्र की मूल संरचना को कमजोर करने जैसा है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकारी एजेंसियों, ईवीएम, चुनाव आयोग और मीडिया पर हमला किया है। अब न्यायपालिका को टारगेट कर रही हैं। उन्हें एहसास नहीं है कि वे भारतीय लोकतंत्र की मूल संरचना पर हमला कर रहे हैं। देश की जनता उन्हें करारा जवाब देगी और जिंदगी भर का सबक सिखाएगी।”
इसके साथ ही, किरेन रिजिजू ने 1975 के ‘आपातकाल’ और कांग्रेस के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या उस समय लोकतंत्र सही मायनों में काम कर रहा था।
एक अन्य पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने लिखा, “क्या 1975 में जब आपातकाल लगा था, तब भारतीय लोकतंत्र फल-फूल रहा था? 1973 में कांग्रेस सरकार ने 3 सबसे वरिष्ठ जजों को नजरअंदाज करके मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘पिंजरे में बंद तोता’ कहा था। एक मुख्य चुनाव आयुक्त को केंद्रीय मंत्री बना दिया गया। कांग्रेस सांसद बहरुल इस्लाम को हाईकोर्ट का जज बनाया गया था। संविधान के सभी शीर्ष अधिकारियों और एजेंसियों के प्रमुखों की नियुक्ति पहले सीधे कांग्रेस सरकारों की ओर से की जाती थी, जबकि अब यह एक कमेटी के जरिए होता है।”
रिजिजू ने कांग्रेस पर संविधान में बदलाव और संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “वे ‘नकली’ और ‘छद्म-धर्मनिरपेक्ष’ लोग तब कहां थे, जब कांग्रेस सरकार ने भीमराव अंबेडकर और संविधान निर्माताओं की ओर से भारत को दिए गए संविधान की प्रस्तावना को ही बदल दिया था?”
केंद्रीय मंत्री ने पोस्ट के आखिर में लिखा, “कांग्रेस पार्टी के पापों का तो कोई अंत ही नहीं है। भारत की जनता बेवकूफ नहीं है।”
–आईएएनएस
डीसीएच/
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