पटना, 7 मई (आईएएनएस)। महिषी ब्लॉक के बलुआहा स्थित सरकारी मिडिल स्कूल में दोपहर का भोजन करने के बाद 250 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए, जिसके बाद गुरुवार को सहरसा में स्वास्थ्य संकट की स्थिति पैदा हो गई।
भोजन करने के तुरंत बाद, कई छात्रों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर आना और बेचैनी की शिकायत की, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
बच्चों के स्वास्थ्य में अचानक आई गिरावट से शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मच गई।
सभी प्रभावित छात्रों को तुरंत महिशी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सा दल की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी संख्या में बच्चों के आने से भारी भीड़ हो गई, जबकि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार छात्रों की जांच और उपचार में लगे रहे।
कक्षा 5 के छात्र रोहित कुमार के अनुसार, स्कूल में दोपहर के भोजन में लगभग 10:00 बजे चावल और दाल परोसी गई।
खाना खाने के कुछ ही समय बाद, उन्हें पेट में तेज दर्द, उल्टी और चक्कर आने लगे।
कक्षा 7 की एक अन्य छात्रा शिवानी ने भी बताया कि स्कूल में परोसा गया खाना खाने के तुरंत बाद कई बच्चे बीमार पड़ने लगे।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्थिति का जायजा लेने के लिए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लेने के लिए महिशी स्कूल का दौरा किया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित छात्रों की हालत स्थिर है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने अभिभावकों से न घबराने की अपील की।
हालांकि, इस घटना से स्कूल में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में आक्रोश और चिंता फैल गई है।
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध खाद्य विषाक्तता के सटीक कारण का पता लगाने के लिए मध्याह्न भोजन के नमूनों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजने की तैयारी चल रही है।
डॉ. राज नारायण प्रसाद ने पुष्टि की कि संदिग्ध खाद्य विषाक्तता के मामले सामने आए हैं, और बताया कि सभी प्रभावित बच्चों का इलाज चल रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि जिन छात्रों की हालत अपेक्षाकृत गंभीर लग रही है, उन्हें बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अधिकारियों ने कहा है कि सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं, हालांकि इस घटना ने स्कूलों में दोपहर के भोजन की व्यवस्था में खाद्य सुरक्षा मानकों के संबंध में एक बार फिर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
–आईएएनएस
एमएस/
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