एक दशक में दोगुनी हुई भारत की बिजली मांग, स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट पहुंची: सरकार

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नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत का बिजली क्षेत्र पिछले एक दशक में अभूतपूर्व विस्तार का साक्षी बना है। तेजी से बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली की बढ़ती खपत के चलते देश की बिजली मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता, ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। केंद्र सरकार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश की अधिकतम बिजली मांग (पीक पावर डिमांड) लगभग दोगुनी हो गई है। वर्ष 2013-14…

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत का बिजली क्षेत्र पिछले एक दशक में अभूतपूर्व विस्तार का साक्षी बना है। तेजी से बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली की बढ़ती खपत के चलते देश की बिजली मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता, ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है।

केंद्र सरकार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश की अधिकतम बिजली मांग (पीक पावर डिमांड) लगभग दोगुनी हो गई है। वर्ष 2013-14 में जहां यह 135.9 गीगावाट थी, वहीं 21 मई 2026 को यह बढ़कर रिकॉर्ड 270.8 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और घरेलू बिजली खपत में लगातार बढ़ोतरी का परिणाम है।

बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने अपनी कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में भी बड़ा विस्तार किया है। मार्च 2014 में देश की कुल स्थापित क्षमता 249 गीगावाट थी, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर 552 गीगावाट हो गई। इस अवधि में जुड़ी नई क्षमता ने न केवल मौजूदा मांग को पूरा करने में मदद की है, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के लिए भी बिजली व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाया है।

उत्पादन क्षमता के साथ-साथ देश के बिजली पारेषण (ट्रांसमिशन) नेटवर्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अप्रैल 2014 में जहां ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई 2,91,336 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) थी, वहीं जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 5,10,594 सर्किट किलोमीटर हो गई। विस्तारित नेटवर्क ने राष्ट्रीय ग्रिड को अधिक एकीकृत बनाने, विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली प्रवाह को सुगम करने और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

परंपरागत ऊर्जा ढांचे के विस्तार के साथ-साथ भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी तेज प्रगति की है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईरेना) की रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।

31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा है और पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

भारत ने जलवायु और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके साथ ही भारत ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 तक हासिल किए जाने वाले इस लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया।

–आईएएनएस

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IANS Agency

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