चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून बारिश ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ा

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जयपुर, 16 जून (आईएएनएस)। राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आधिकारिक तौर पर आने से पहले ही चित्तौड़गढ़ ज़िले में मॉनसून-पूर्व (प्री-मॉनसून) बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जून के पहले 15 दिनों में जिले में 88 मिमी बारिश हुई, जो पिछले तीन सालों में इसी अवधि में हुई बारिश के स्तर से ज़्यादा है। नौतपा के दौरान पड़ी भीषण गर्मी के बाद मॉनसून के कमजोर रहने की जो उम्मीदें थीं, असामान्य रूप से हुई भारी बारिश ने उन्हें गलत साबित कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून के 22 जून से 25 जून के बीच चित्तौड़गढ़…

जयपुर, 16 जून (आईएएनएस)। राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आधिकारिक तौर पर आने से पहले ही चित्तौड़गढ़ ज़िले में मॉनसून-पूर्व (प्री-मॉनसून) बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जून के पहले 15 दिनों में जिले में 88 मिमी बारिश हुई, जो पिछले तीन सालों में इसी अवधि में हुई बारिश के स्तर से ज़्यादा है।

नौतपा के दौरान पड़ी भीषण गर्मी के बाद मॉनसून के कमजोर रहने की जो उम्मीदें थीं, असामान्य रूप से हुई भारी बारिश ने उन्हें गलत साबित कर दिया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून के 22 जून से 25 जून के बीच चित्तौड़गढ़ और मेवाड़ क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है। अगर मौसम का मौजूदा हाल ऐसा ही रहा, तो जून 2026 हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा बारिश वाले महीनों में से एक हो सकता है।

पिछले चार वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़े बताते हैं कि इस साल मानसून-पूर्व बारिश का कितना महत्व रहा है। जून के केवल पहले पंद्रह दिनों में 88 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो जून 2025 के पूरे महीने में हुई 75 मिलीमीटर बारिश से अधिक है। यह जून 2024 में हुई कुल 91.2 मिलीमीटर बारिश के भी लगभग बराबर है।

हालांकि, बारिश का स्तर 2023 की इसी अवधि में हुई बारिश (जब चक्रवात बिपरजॉय के कारण बहुत भारी बारिश हुई थी) से थोड़ा कम है, फिर भी मौसम विशेषज्ञ मौजूदा पैटर्न को सामान्य प्री-मानसून सीजन के हिसाब से बहुत असामान्य मानते हैं। ये आंकड़े इस साल देखी गई असामान्य रूप से तेज प्री-मानसून गतिविधि को दिखाते हैं। अच्छी शुरुआत के बावजूद मौसम वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि पूरे मानसून सीजन पर अभी भी अल-नीनो की स्थितियों का असर पड़ सकता है।

आईएमसी जयपुर के डायरेक्टर डॉ. आर.एस. शर्मा के अनुसार, सक्रिय अल-नीनो की स्थिति मुख्य मॉनसून महीनों के दौरान बारिश को कम कर सकती है। इस घटनाक्रम में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हवाओं को कमजोर करने और मौसमी बारिश को कम करने की क्षमता है। नतीजतन, इस साल मॉनसून की कुल बारिश लंबे समय के औसत का लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है, जिससे यह प्री-मॉनसून की भारी बारिश के बावजूद सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आ जाएगी।

अल नीनो एक मौसम संबंधी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर भी पड़ता है। आमतौर पर अल नीनो के कारण मानसून कमजोर हो जाता है, जिससे सामान्य से कम बारिश होती है और सूखे की स्थिति बन सकती है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल तट पर पहुंच चुका है और अब यह प्रायद्वीपीय तथा पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

–आईएएनएस

एसएचके/एएस

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