नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने मंडी गांव के पास डेरा मंडी रोड पर लगातार जलभराव की समस्या का गंभीर संज्ञान लिया है।
दिल्ली पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शुक्रवार को छतरपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया और समस्या के समाधान के लिए उपायों की घोषणा की।
डेरा मंडी रोड पर भारी बारिश का पानी जमा होने की सूचना मिलने के बाद मंत्री ने सड़क, जल निकासी नेटवर्क और सीवर व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ थे।
प्रभावित क्षेत्र एमसीडी के अधिकार क्षेत्र में आता है। बयान में कहा गया है कि जनसुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दिल्ली सरकार तत्काल राहत और दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
तत्काल उपाय के रूप में, पीटीओ पंप तैनात किए गए हैं और प्रभावित क्षेत्र से जमा पानी को निकालने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि यह स्थान एक प्राकृतिक निचला इलाका है जहां भारी बारिश के दौरान जलभराव होता है।
पहले, जमा हुआ पानी एक प्राकृतिक नाले के माध्यम से हरियाणा की ओर बह जाता था। लेकिन अब वह नाला न होने के कारण, बारिश का पानी इस स्थान पर ही जमा हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भारी बारिश के दौरान बार-बार जलभराव होता है।
स्थल का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद, यह निर्णय लिया गया कि पीडब्ल्यूडी डेरा मंडी रोड से डेरा भाटी रोड तक एक नया प्रीकास्ट आरसीसी नाला बनाएगा, जो फिर बांध रोड से जुड़ेगा, जहां से पानी को दिल्ली के एसएसएन मार्ग नाले में पंप किया जाएगा।
यह परियोजना क्षेत्र में स्थायी जल निकासी समाधान प्रदान करने और वर्षा जल प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार करने के लिए बनाई गई है।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि मंडी गांव और डेरा गांव दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित हैं। वर्षों पहले, बड़े पैमाने पर शहरी विकास से पहले और गुरुग्राम के आज के विस्तार से पहले, बारिश का पानी मौजूदा जल निकासी चैनलों के माध्यम से स्वाभाविक रूप से बहता था।
उन्होंने कहा कि आज, व्यापक कंक्रीट निर्माण, तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण, वे प्राकृतिक जलमार्ग लुप्त हो गए हैं। परिणामस्वरूप, भारी वर्षा के दौरान यहां बारिश का पानी और यहां तक कि सीवर का पानी भी जमा हो जाता है।
मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार वैज्ञानिक योजना और टिकाऊ इंजीनियरिंग समाधानों के माध्यम से पुरानी अवसंरचना संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल हर बार बारिश के बाद पानी निकालना नहीं है, बल्कि ऐसी अवसंरचना का निर्माण करना है जो जलभराव को ही रोके। प्रत्येक संवेदनशील स्थान का आकलन किया जा रहा है और दीर्घकालिक समाधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा रहा है।
–आईएएनएस
एमएस/
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