परिसीमन संबंधी चिंताओं पर अर्जुन राम मेघवाल का विपक्ष पर तंज, कहा- ‘संविधान पढ़ें, उसे यूं ही लेकर न चलें’

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नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाओं पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि विपक्षी नेताओं को संविधान की प्रतियां सिर्फ साथ लेकर चलने के बजाय उसमें लिखी बातों को पढ़ना और समझना चाहिए। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आईएएनएस के विशेष साक्षात्कार में कहा कि परिसीमन को लेकर चल रही बहस और विपक्ष की ओर से लगातार जताई जा रही चिंताओं के बारे में सवाल किया गया। विपक्षी दलों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि…

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाओं पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि विपक्षी नेताओं को संविधान की प्रतियां सिर्फ साथ लेकर चलने के बजाय उसमें लिखी बातों को पढ़ना और समझना चाहिए।

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आईएएनएस के विशेष साक्षात्कार में कहा कि परिसीमन को लेकर चल रही बहस और विपक्ष की ओर से लगातार जताई जा रही चिंताओं के बारे में सवाल किया गया। विपक्षी दलों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल को इस मुद्दे पर सावधानी बरतनी चाहिए।

इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि परिसीमन को लेकर संवैधानिक स्थिति पहले से स्पष्ट है और विपक्ष को इसकी जानकारी होनी चाहिए।

मेघवाल ने कहा, “विपक्ष जानता है कि संविधान में 2026 लिखा हुआ है और परिसीमन करना ही होगा। यह संविधान में लिखा हुआ है।”

इसके बाद उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अक्सर संविधान की प्रतियां लेकर चलते हैं, लेकिन उसके प्रावधानों को ध्यान से नहीं पढ़ते।

उन्होंने कहा, “वे संविधान की किताब लेकर चलते हैं, लेकिन संविधान में क्या लिखा है? वे उसे पढ़ते नहीं हैं।”

मेघवाल की यह टिप्पणी परिसीमन को लेकर विपक्ष की ओर से की जा रही आलोचना और जताई जा रही आशंकाओं के जवाब में आई है। केंद्र सरकार पहले ही परिसीमन विधेयक, 2026 के साथ-साथ इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक ला चुकी है। इस पैकेज पर लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को 21 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई थी। चर्चा में 131 सांसदों ने हिस्सा लिया था, लेकिन संविधान संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका।

अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि उसके सदस्यों को संसद में अपनी बात रखने की स्वतंत्रता नहीं दी जा रही है।

उन्होंने कहा, “एक तरफ वे कहते हैं कि हमें बोलने की आजादी नहीं है और दूसरी तरफ वे अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। अगर विपक्ष कह रहा है कि उन्हें बोलने की आजादी नहीं है, तो वे बोल कैसे रहे हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “एक तरफ वे कहते हैं कि उन्हें प्रदर्शन करने की भी अनुमति नहीं दी जाती। तो फिर वे असम्मानजनक तरीके से प्रदर्शन कैसे कर रहे हैं? इसका मतलब है कि वे झूठ बोल रहे हैं।”

मेघवाल ने आगे आरोप लगाया कि विपक्ष के सदस्य खुद ही अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “इसी वजह से नए सांसद भी खुश नहीं हैं।”

–आईएएनएस

एसएके/एएस

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IANS Agency

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