चंडीगढ़, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की प्रदेश में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना, जुर्माना लगाना और उनके भूमि अभिलेखों में ‘लाल प्रविष्टियां’ करना “किसी भी तरह से समस्या का समाधान नहीं है।”
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनकी कठिनाइयों को समझना चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यभर में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों को उचित पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी, सब्सिडी, डीजल और वित्तीय सहायता समय पर उपलब्ध कराए।
खन्ना ने यहां एक बयान में कहा, “छोटे और सीमांत किसानों को बेलर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और अन्य कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराने के लिए ग्राम स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत, कृषि खर्च में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। ऐसे हालात में उन पर जुर्माना लगाकर और पुलिस कार्रवाई शुरू करके अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने सरकार से किसानों के संगठनों के साथ चर्चा करने और समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजने का आग्रह किया। सरकार को किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें आवश्यक सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए और उन्हें पराली प्रबंधन के प्रभावी तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
एक दिन पहले, एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की एक उच्चस्तरीय टीम ने पंजाब के संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला जिलों में धान की पराली प्रबंधन उपायों की समीक्षा की।
सीएक्यूएम के अधिकारियों ने संबंधित विभागों को पराली जलाने की घटनाओं की कड़ी निगरानी के साथ समन्वित प्रयास जारी रखने को कहा। टीम ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने द्वारा किए गए वादों के अनुसार धान के अवशेषों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करें।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जमीनी स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए। टीम ने मलेरकोटला स्थित एक डुप्लेक्स बोर्ड और पेपर बनाने वाली इकाई का दौरा किया, जो धान के अवशेषों के उपयोग की सुविधा प्रदान करती है और अपने बॉयलर में ईंधन के रूप में धान की भूसी का उपयोग करती है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनके बॉयलर फर्नेस में प्रतिवर्ष लगभग 17,000 मीट्रिक टन धान की भूसी का उपयोग किया जाएगा।
–आईएएनएस
एएसएच/पीएम
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