सागर: दीवार गिरने से 9 बच्चों की मौत मामले में अदालत ने तीन लोगों को ठहराया दोषी, पांच साल की जेल

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सागर, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। शाहपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत के करीब 19 महीने बाद स्थानीय अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है और तीन लोगों को लापरवाही का दोषी ठहराया है। सागर में हुए इस दर्दनाक हादसे में स्थानीय अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। 9वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश सिंह की अदालत ने जर्जर मकान के मालिक मुलू पटेल और श्रीमद भागवत कथा के आयोजक संजू उर्फ केशव पटेल तथा शिव पटेल को आपराधिक लापरवाही का दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा…

सागर, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। शाहपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत के करीब 19 महीने बाद स्थानीय अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है और तीन लोगों को लापरवाही का दोषी ठहराया है।

सागर में हुए इस दर्दनाक हादसे में स्थानीय अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। 9वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश सिंह की अदालत ने जर्जर मकान के मालिक मुलू पटेल और श्रीमद भागवत कथा के आयोजक संजू उर्फ केशव पटेल तथा शिव पटेल को आपराधिक लापरवाही का दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

इस फैसले से पीड़ित परिवारों को कुछ हद तक न्याय मिलने का एहसास हुआ है और साथ ही यह जवाबदेही और जन सुरक्षा को लेकर एक सख्त संदेश भी देता है।

यह हादसा 4 अगस्त 2024 को शाहपुर में हुआ था, जब हरदौल बाबा मंदिर के पास 2 से 12 अगस्त तक चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान तीसरे दिन एक जर्जर दो मंजिला मकान की दीवार अचानक गिर गई। उस समय टेंट के नीचे बच्चे शिवलिंग निर्माण कार्यक्रम में शामिल थे।

इस हादसे में 10 से 15 साल की उम्र के 11 बच्चे मलबे में दब गए थे। ग्रामीणों के बचाव प्रयासों के बावजूद दिव्यांश, नितेश, आशुतोष, प्रिंस, पर्व, देवराज, वंश (मयंक), हेमंत और ध्रुव सहित नौ बच्चों की मौत हो गई, जबकि सुमित प्रजापति और खुशी पटवा लंबे इलाज के बाद बच गए।

अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेश बछकैनिया ने मामले में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

हादसे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य और पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी को उनके पदों से हटा दिया था, जिससे सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय हुई।

अदालत के इस फैसले का पीड़ित परिवारों ने स्वागत किया है, हालांकि वे अब भी धार्मिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के पास भवन सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत बताई है।

–आईएएनएस

एएमटी/डीएससी

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