मजबूत आर्थिक संकेतकों से भारत की विकास यात्रा को मिला नया बल, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अर्थव्यवस्था दिखा रही मजबूती

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नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आर्थिक संकेतक बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। मजबूत जीडीपी वृद्धि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का विस्तार, रिकॉर्ड वाहन बिक्री, बेहतर जीएसटी संग्रह और निर्यात में स्थिरता इस बात का संकेत हैं कि देश में घरेलू मांग और निवेश का माहौल लगातार मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। अंतिम तिमाही में विकास दर और तेज हुई…

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आर्थिक संकेतक बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। मजबूत जीडीपी वृद्धि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का विस्तार, रिकॉर्ड वाहन बिक्री, बेहतर जीएसटी संग्रह और निर्यात में स्थिरता इस बात का संकेत हैं कि देश में घरेलू मांग और निवेश का माहौल लगातार मजबूत बना हुआ है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। अंतिम तिमाही में विकास दर और तेज हुई तथा चौथी तिमाही में रियल जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 7 प्रतिशत से अधिक है। इस वृद्धि में विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, उपभोग और निवेश का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

देश के विनिर्माण क्षेत्र में भी लगातार मजबूती बनी हुई है। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जून 2026 में 54.2 पर रहा, जो लगातार 37वें महीने 50 अंकों के स्तर से ऊपर बना हुआ है। यह संकेत देता है कि विनिर्माण गतिविधियों में लगातार विस्तार हो रहा है।

सर्वेक्षण के अनुसार उत्पादन, नए ऑर्डर, रोजगार और खरीद गतिविधियों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग और कारोबारी विश्वास के मजबूत बने रहने को दर्शाती है।

सेवा क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पर पहुंच गया, जो नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है।

औद्योगिक उत्पादन में भी सुधार जारी है। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) अप्रैल के 4.9 प्रतिशत से बढ़कर मई 2026 में 5.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का उच्चतम स्तर है। इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र की 5.5 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति की 9.9 प्रतिशत वृद्धि का अहम योगदान रहा। वहीं, मोटर वाहन और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा, पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) के उत्पादन में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश गतिविधियों में तेजी और औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है।

केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) अभियान भी नए वित्त वर्ष में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान पूंजीगत व्यय 2.51 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 2.21 लाख करोड़ रुपए था। यानी सिर्फ दो महीनों में करीब 29,650 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजीगत निवेश किया गया।

सरकार का यह निवेश मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, दूरसंचार, रक्षा और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में किया जा रहा है, जो सार्वजनिक निवेश रणनीति का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद कर संग्रह भी मजबूत बना हुआ है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान सकल कर राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का राजस्व आधार स्थिर बना हुआ है।

जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 1.71 लाख करोड़ रुपए था।

वहीं, 17 जून तक चालू वित्त वर्ष में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों श्रेणियों से कर संग्रह में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई।

पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी ने सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय संतुलन (फिस्कल कंसोलिडेशन) के लक्ष्य पर आगे बढ़ने में मदद की है।

व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। मई में ई-वे बिल की संख्या में 10.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो देश भर में वस्तुओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी मांग मजबूत बनी हुई है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान वाहन बिक्री में लगातार अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। अप्रैल में 26.11 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो भारत के ऑटो रिटेल बाजार के इतिहास में किसी भी अप्रैल महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक रुझान बना हुआ है। मई में ग्रामीण क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऊंचे आधार के बावजूद ग्रामीण मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

–आईएएनएस

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