तेलंगाना ने केंद्र से एसएएससीआई योजना के तहत मांगे 5,000 करोड़ रुपए

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हैदराबाद, 20 मई (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत केंद्र सरकार से अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान यह अनुरोध किया। वित्त विभाग संभाल रहे मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने निर्मला सीतारमण के साथ राज्य के विकास, शैक्षणिक ढांचे और पूंजीगत खर्च से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने तेलंगाना के लिए एसएएससीआई के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़…

हैदराबाद, 20 मई (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत केंद्र सरकार से अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है।

उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान यह अनुरोध किया।

वित्त विभाग संभाल रहे मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने निर्मला सीतारमण के साथ राज्य के विकास, शैक्षणिक ढांचे और पूंजीगत खर्च से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने तेलंगाना के लिए एसएएससीआई के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की विशेष वित्तीय सहायता मंजूर करने का अनुरोध किया।

उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री को शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन विकास क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे बड़े निवेश और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी।

शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे बड़े निवेश, खासकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) द्वारा मंजूर बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (ईएपी) को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील की।

पिछले वर्ष सितंबर में निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में भी विक्रमार्क ने राज्य के 30,000 करोड़ रुपए के यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स कार्यक्रम के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी।

इस संबंध में विक्रमार्क के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन भी सौंपा था।

उपमुख्यमंत्री ने बताया था कि 30,000 करोड़ रुपए की यह पहल लाखों बच्चों की शिक्षा और पोषण व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी, वंचित समुदायों को सशक्त बनाएगी और भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगी।

कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव समेत प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री से इस दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश के लिए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत छूट देने का अनुरोध किया था।

निर्मला सीतारमण को बताया गया कि यह कार्यक्रम छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की चुनौतियों को दूर करने के लिए शुरू किया गया है।

उन्हें यह भी बताया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित है। एसईईपीईसी आंकड़ों के अनुसार, 56.33 प्रतिशत आबादी पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से आती है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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