अगरतला, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। इंडिया ब्लॉक की पार्टियों द्वारा शुक्रवार को यहां आयोजित एक विशाल विरोध रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं सहित हजारों लोगों ने भाग लिया। इन प्रदर्शनकारियों ने चुनावी धांधली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के आरोपों के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
हजारों तिरंगे झंडे लिए देशभक्ति गीत गाते और नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारी राज्य की राजधानी अगरतला की सड़कों पर उतरे और वोट चोरी और अन्य कई चुनावी धांधली के आरोपों के मद्देनजर सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।
आठ राजनीतिक दलों (कांग्रेस, सीपीआई (एम), सीपीआई, क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी, अखिल भारतीय अग्रदल, सीपीआई (एमएल), गण मंच और त्रिपुरा पीपुल्स पार्टी) से मिलकर बने इंडिया ब्लॉक की त्रिपुरा इकाई ने संयुक्त रूप से विरोध रैली का आयोजन किया और अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।
प्रदर्शनकारी शहर के विभिन्न हिस्सों में मार्च करते हुए नारे लगाते रहे और चुनावी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते रहे।
रैली में भारी जनभागीदारी देखी गई, जिसमें प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए देश की चुनावी प्रणाली में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की।
विरोध रैली के बाद राज्य की राजधानी में एक जनसभा आयोजित की गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची की चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को निलंबित करने की अपनी मांग दोहराई।
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता माणिक सरकार, विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी, पूर्व मंत्री माणिक डे, त्रिपुरा राज्य कांग्रेस अध्यक्ष आशीष कुमार साहा, पूर्व मंत्री और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सुदीप रॉय बर्मन, साथ ही इंडिया ब्लॉक के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विरोध रैली का नेतृत्व किया और सभा को संबोधित किया।
चार सूत्री मांगों के चार्टर में मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार को हटाना, चल रही एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेना, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कथित रूप से प्रभावित करने वाले प्रावधानों की समीक्षा करना और मुख्य चुनाव आयुक्त को दिए गए कानूनी संरक्षणों का विरोध करना शामिल है।
सीपीआई (एम) त्रिपुरा राज्य सचिव और जितेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो एसआईआर प्रक्रिया के कारण वैध मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है।
उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाया और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
चौधरी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत देशभर में लगभग 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, और आशंका है कि आगामी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान त्रिपुरा की मतदाता सूची से 25 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।
त्रिपुरा राज्य कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए मतदाता पंजीकरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिनमें डुप्लिकेट प्रविष्टियां और कुछ पतों पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाताओं का पंजीकरण शामिल है।
उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए और चेतावनी दी कि इस तरह की कथित अनियमितताएं देश की चुनावी प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं।
कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने इंडिया ब्लॉक से बाहर के राजनीतिक दलों के साथ-साथ लोकतंत्र के अन्य समर्थकों से भी कथित चुनावी कदाचार के खिलाफ अभियान में शामिल होने की अपील की।
–आईएएनएस
एमएस/
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