लखनऊ, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने शुक्रवार को लखनऊ में पुलिस या सेना के अधिकारियों की लक्षित हत्या (टारगेटेड किलिंग) करने की एक साजिश को नाकाम कर दिया। इस मामले में पाकिस्तान के प्रतिबंधित ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ (एसबीएन) से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बताया कि एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों से शुरुआती पूछताछ में पता चला कि वे ‘राणा भाई’ नामक एक पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे। उन्हें कथित तौर पर किसी पुलिसकर्मी या सैन्यकर्मी की हत्या करने और इस घटना का वीडियो अपने हैंडलर को भेजने का काम सौंपा गया था। एटीएस ने आरोपियों के पास से विदेश में बनी एक पिस्तौल और 20 कारतूस बरामद किए हैं।
कानून-व्यवस्था के एडीजी अमिताभ यश के अनुसार, खुफिया जानकारी से पता चला था कि प्रतिबंधित ‘शहजाद भट्टी नेटवर्क’ के सदस्य भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने और सेना तथा पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए पंजाब के युवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गैंगस्टर गगनदीप सिंह और उसके साथी पाकिस्तानी हैंडलर ‘राणा भाई’ के संपर्क में थे।
इस जानकारी के आधार पर, एटीएस ने शुक्रवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर के 26 वर्षीय गगनदीप सिंह और गुरदासपुर (पंजाब) के 19 वर्षीय रजत कुमार तथा 21 वर्षीय कृष के रूप में हुई है। एक नाबालिग को भी पुलिस की निगरानी में रखा गया है।
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें इस काम को अंजाम देने के लिए 3 लाख रुपए देने का वादा किया गया था। उन्होंने बताया कि वे 27 अक्टूबर को अमृतसर से निकले, दिल्ली होते हुए यात्रा की और 29 अक्टूबर की आधी रात के आसपास लखनऊ पहुंचे। आरोपी इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से राणा भाई के संपर्क में थे।
लखनऊ पहुंचने के बाद, गिरफ्तार व्यक्तियों ने कथित तौर पर लखनऊ रेलवे स्टेशन का एक वीडियो रिकॉर्ड किया और निर्देशानुसार उसे अपने हैंडलर को भेज दिया। पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि राणा भाई ने उन्हें बताया था कि हथियार और गोला-बारूद पाकिस्तान से मंगवाए जाएंगे।
लखनऊ पहुंचने पर, आरोपियों को कथित तौर पर एक स्थानीय संपर्क के माध्यम से पिस्तौल और कारतूस उपलब्ध कराए गए। हैंडलर ने उनके खर्चों के लिए दो बार प्रत्येक को 2,500 रुपए भी भेजे। उन्हें कथित तौर पर वादा किया गया था कि ऑपरेशन पूरा करने के बाद उन्हें नेपाल भागने में मदद की जाएगी।
एटीएस की प्रारंभिक जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन पर वर्चुअल नंबरों से संचालित व्हाट्सएप अकाउंट और विदेशी नंबरों से संचार पाया गया है। फोन की जांच से संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से संबंधित जानकारी भी मिली है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन स्थलों की जानकारी पाकिस्तानी संचालक के साथ साझा की गई थी।
–आईएएनएस
एमएस/
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