अगरतला, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खाद्यान्न तथा बागवानी फसलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कृषि और बागवानी क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। यह बात राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने रविवार को कही।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2025-26 के बीच राज्य के 204 कृषि बाजारों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 461.83 करोड़ रुपए की परियोजनाएं शुरू की गईं। इनमें से 87 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 117 परियोजनाओं पर काम जारी है।
रतन लाल नाथ ने कल्याणपुर और खोवाई में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और नई योजनाओं का शिलान्यास करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने खोवाई जिले में कृषि, बागवानी और मृदा संरक्षण विभाग के उपनिदेशक कार्यालय का उद्घाटन किया। साथ ही जिले के ब्रिंदावन घाट बाजार में दो मंजिला ग्रामीण बाजार का उद्घाटन कर उसे किसानों और व्यापारियों के लिए समर्पित किया।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में त्रिपुरा में 554 कृषि बाजार हैं। इन बाजारों में शेड, दुकानें, शौचालय, पेयजल और जल निकासी जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है ताकि उनकी कार्यप्रणाली बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर सुविधाएं और उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।
रतन लाल नाथ ने बताया कि वर्ष 2013 से 2017 के बीच 20.26 करोड़ रुपए की लागत से 71 बाजार विकास परियोजनाएं शुरू की गई थीं। वहीं 2018-19 से 2025-26 के बीच 461.83 करोड़ रुपए की लागत से 204 परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि अब राज्य के हर जिले में कृषि और बागवानी एवं भूमि संरक्षण विभाग के उपनिदेशक तैनात हैं। साथ ही सरकार ने किसानों तक केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में कृषि उपमंडल कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है।
मंत्री के अनुसार, वर्तमान में त्रिपुरा में 47 कृषि उपमंडल कार्यालय और 9 बागवानी एवं भूमि संरक्षण उपमंडल कार्यालय कार्यरत हैं।
रतन लाल नाथ ने बताया कि सरकार ने प्रत्येक किसान को विशिष्ट किसान आईडी (फार्मर आईडी) प्रदान करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि किसानों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
प्राकृतिक खेती के बारे में उन्होंने बताया कि वर्तमान में 5,550 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिससे 13,875 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अतिरिक्त 11,250 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 से अब तक 17.2 करोड़ रुपए मूल्य की जैविक उपज देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में बेची जा चुकी है।
कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्यभर में 50,300 कृषि मशीनें वितरित की गई हैं, जिन पर 233.63 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।
इसके मुकाबले वर्ष 2013 से 2017 के बीच केवल 2,600 कृषि मशीनें वितरित की गई थीं, जिन पर 28.35 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई थी।
–आईएएनएस
एएमटी/वीसी
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