जून में भी भारत को सबसे अधिक एलपीजी सप्लाई करने वाला देश बना अमेरिका

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नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका जून में भी भारत को द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश बना रहा। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, जिसके चलते अमेरिका ने पारंपरिक खाड़ी देशों पर अपनी बढ़त और मजबूत कर ली है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत ने अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 टीएमटी) एलपीजी आयात की, जो मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है। वहीं, जून के दौरान भारत…

नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका जून में भी भारत को द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश बना रहा। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है, जिसके चलते अमेरिका ने पारंपरिक खाड़ी देशों पर अपनी बढ़त और मजबूत कर ली है।

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत ने अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 टीएमटी) एलपीजी आयात की, जो मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है। वहीं, जून के दौरान भारत का कुल एलपीजी आयात 3 प्रतिशत बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन (1,191 टीएमटी) हो गया, जबकि मई में यह 11.55 लाख मीट्रिक टन (1,155 टीएमटी) था।

जून में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा, जहां से आयात 16.6 प्रतिशत बढ़कर 1.57 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया, जो मई में 1.34 लाख मीट्रिक टन था। वहीं, सऊदी अरब और कुवैत ने जून में भारत को 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की।

अमेरिका से एलपीजी आयात में लगातार बढ़ोतरी भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाया जा रहा है। इसी दिशा में सरकारी तेल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात करने के लिए दीर्घकालिक समझौता भी किया है, जिससे भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा तथा खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी दोनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं।

ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए भारत अब केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ा रहा है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात का रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था। इससे स्पष्ट होता है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर थी। हालांकि संघर्ष के दौरान आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने आयात के स्रोतों का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया, ताकि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर कम किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी भारत अपनी ऊर्जा आयात विविधीकरण की नीति जारी रखेगा। हालांकि खाड़ी देश आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, लेकिन भारतीय रिफाइनरियां अब कई देशों से आयात का संतुलित मिश्रण बनाए रखेंगी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थिर बनी रहे।

–आईएएनएस

डीबीपी

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