तिरुवनंतपुरम, 3 जुलाई (आईएएनएस)। केरल सरकार ने राज्य के सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी रिक्तियों की जानकारी केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) को भेजें। सरकार ने साफ कहा है कि जो अधिकारी इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी यह निर्देश सिर्फ सरकारी विभागों पर ही नहीं बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) पर भी लागू होगा।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब सरकारी विभागों में रिक्त पदों की जानकारी समय पर नहीं देने के कारण अस्थायी नियुक्तियों में अनियमितताओं के आरोप बढ़ रहे हैं। इसे लेकर सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकार के इस निर्देश को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और लोगों का भरोसा दोबारा कायम करने की दिशा में पहला बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
मई में वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) की हाल की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद सरकार ने मामले की आंतरिक सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं।
हालांकि, युवा मामलों के मंत्री ओ.जे. जेनेश की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सरकार जांच की प्रगति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे संकेत भी मिले हैं कि हाल की भर्ती प्रक्रियाओं की और व्यापक जांच कराई जा सकती है।
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के मौजूदा अध्यक्ष और 15 सदस्यों की नियुक्ति पिनारयी विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में हुई थी। एलडीएफ सरकार 2016 से 2026 तक राज्य की सत्ता में रही।
आयोग में फिलहाल पांच पद रिक्त हैं। संविधान के अनुसार, पीएससी अध्यक्ष या सदस्य छह साल के लिए या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद पर बने रहते हैं।
अर्थशास्त्र और सांख्यिकी विभाग में रिसर्च ऑफिसर की भर्ती परीक्षा को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। उम्मीदवारों ने परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है, उनका दावा है कि प्रश्न पत्र न्यूनतम योग्यता के रूप में निर्धारित स्नातकोत्तर मानक को प्रतिबिंबित नहीं करता है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर कुंजी इस तरह से तैयार की गई थी कि असामान्य रूप से बड़ी संख्या में प्रश्नों के लिए विकल्प ‘बी’ सही उत्तर बन गया।
परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग करते हुए उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से संपर्क किया है और आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है।
सरकार द्वारा चल रही सतर्कता जांच के साथ-साथ इन शिकायतों की भी जांच किए जाने की उम्मीद है, जिससे पीएससी का कामकाज नए प्रशासन की जांच के दायरे में आने वाले पहले प्रमुख शासन संबंधी मुद्दों में से एक बन जाएगा।
–आईएएनएस
एसएचके/पीएम
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