नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। उर्दू साहित्य की बेबाक लेखिका इस्मत चुगताई की शनिवार को 111वीं जयंती है। उनका जन्म 21 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था। उनको ‘इस्मत आपा’ के नाम से भी पुकारा जाता है। वे नारीवादी लेखिका रही हैं; प्रगतिशील लेखकों की सूची में उनका नाम आता है।
इस्मत चुगताई ने अपने लेखन के माध्यम से महिलाओं के हितों वाले सवालों को उठाया। उनके लेखन में महिलाओं की आजादी और उनके अधिकार की बातें नजर आती हैं। उन्होंने अपनी लेखनी में धर्मनिरपेक्षता और आधुनिकता पर जोर दिया; इसी कारण से उनके लिखे कई उपन्यास और कहानियां आज भी लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हैं।
लेखिका इस्मत चुगताई ने बहुत कम उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। जिस उम्र में लड़कियां खाना बनाना सीखती हैं, उस वक्त इस्मत ने कलम को अपनी ताकत बना ली थी। घरवालों ने उनके लेखन कार्य को रोकने की कोशिश की लेकिन उनकी कलम रुकी नहीं। लोग उनको ताना मारते थे; इसके बाद भी उनकी हिम्मत टूटी नहीं। उन्होंने जो ठाना, वह करके दिखाया। लेखनी की वजह से इस्मत को ‘लेडी चंगेज खां’ कहा जाता था। इस्मत को यह नाम लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर ने दिया था।
इस्मत चुगताई को वर्ष 1973 की फिल्म ‘गरम हवा’ के लिए फिल्मफेयर ने सर्वश्रेष्ठ लेखन का पुरस्कार दिया था। इस्मत की लिखी कहानी ‘लिहाफ’ का माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘डेढ़ इश्किया’ में भी इस्तेमाल किया गया था। उनके पति शाहिद लतीफ फिल्म निर्देशक थे। इस्मत की लिखी कहानियों पर उनके पति शाहिद फिल्में बनाते थे। उन्होंने फिल्म की कहानियां लिखने पर जोर दिया और कई फिल्मी कहानियां भी लिखीं। वर्ष 1953 में आई फिल्म ‘फरेब’ में वे सह-निर्देशिका रहीं।
उन्होंने टेढ़ी लकीर, जिद्दी, एक कतरा ए खून, दिल की दुनिया, मासूमा, बहरूप नगर, सैदाई, जंगली कबूतर, अजीब आदमी और बांदी उपन्यास लिखा है। लंबी बीमारी के बाद 24 अक्टूबर 1991 को मुंबई (बॉम्बे) स्थित घर में उनका निधन हो गया।
–आईएएनएस
एसडी/पीएम
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