नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 11वीं-12वीं क्लास की राजनीति विज्ञान की किताबें बनाने वाली कमेटी का पुनर्गठन किया है। इस पर एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत ने आईएएनएस से खास बातचीत की है।
नई टीम पर एनएसयूआई और विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर पूर्व निदेशक जेएस राजपूत ने कहा, “अगर कोई आरएसएस से भी जुड़ा है, तो इसका मतलब नहीं है कि वो शख्स संघ की विचारधारा के अधीन है। किसी भी तरह से, लोगों को इस बात से परेशानी क्यों है कि कोई आरएसएस से जुड़ा हुआ है। क्या उन्हें ये याद नहीं है कि कई दशकों तक कम्युनिस्ट एनसीईआरटी के टेक्सटबुक के लिए लिखा करते थे। क्या उस वक्त लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया? इसलिए वर्तमान में किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं है।”
उन्होंने कहा, “एनसीआरटी के पास बड़ी संख्या में एकेडमी के स्टाफ हैं। फाइनल आउटकम क्या होगा, यह उनकी जिम्मेदारी है। मैं जब डायरेक्टर था, तो मैंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि विशेषज्ञ बाहर से हो सकते हैं, लेखक भी हो सकते हैं, लेकिन किताब का एक-एक शब्द एनसीईआरटी के स्टाफ फाइनल करेंगे। वरना तो ये काम बाहर से भी कराया जा सकता है। एनसीईआरटी के स्टाफ क्यों रखे गए हैं।”
उन्होंने कहा कि एक मामले में किसी विषय के फाइनल अप्रूवल के लिए एक टेक्सटबुक मेरे पास आया था। मैं हर विषय का विशेषज्ञ नहीं हूं, लेकिन यह मुझे दूसरे प्रोफेसर से मिला था। मैंने उन्हें कहा कि अभिभावक की तरह इसको पढ़िए। अगले दिन वो प्रोफेसर मेरे पास आईं, और कई सारी चीजें बोलीं। उनमें से एक बात मैं जरूर बताना चाहूंगा। प्रोफेसर ने कहा कि राजीव गांधी की हत्या तमिल क्रिश्चियन ने की थी। एनसीईआरटी इसे पब्लिश नहीं कर सकता है। मैंने अगले दिन लेखक को बुलाया और कहा कि ये पब्लिश नहीं हो सकता है। यह एनसीईआरटी के स्टाफ की जिम्मेदारी हो सकती है।
पूर्व निदेशक ने कहा कि अगर इसमें कोई विचारधारा है और वो साफ तौर पर जाहिर हो रही है, तो इसे आगे अप्रूवल देना और न देना एनसीईआरटी की जिम्मेदारी है। अगर आप पूरी तरह बाहर के लोगों पर ही निर्भर करेंगे, तो फिर आपको क्यों रखा गया है। बाहर के लोग आपको इनपुट देंगे और आखिरी फैसला आपका होगा। इसलिए एनसीईआरटी के लिए ये कहना गलत होगा कि हम इन लोगों को नहीं मानते, क्योंकि ये कांग्रेस से जुड़े हैं, या किसी दूसरी पार्टी से हैं। एनसीईआरटी के लिए हर बच्चा भारत का बच्चा है और हर एक प्रोफेसर और हर एक शिक्षक भारत का भविष्य बना रहे हैं। इस विचार के साथ एनसीईआरटी आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि आज जो हो रहा है, उसमें कुछ नया नहीं है। एनसीईआरटी को ज्यादा से ज्यादा लोगों का भरोसा मिल रहा है। 30-35 की उम्र के किसी भी आईएएस अधिकारी से मिलिए, वो बोलेंगे कि एनसीईआरटी की किताब की वजह से आज मैं इस पद पर हूं। मैं जब यात्रा करता हूं और लोगों को अगर पता चलता है कि मैं एनसीईआरटी का निदेशक रह चुका हूं, तो मुझे बहुत सम्मान मिलता है। इसलिए एनसीईआरटी ने लोगों का भरोसा नहीं खोया है, हां इससे जुड़े कई विवाद जरूर हैं। हर बच्चे को सभी धर्मों के आधार के बारे में पता होना चाहिए और उन्हें इन सभी के बीच के अंतर का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि मेरे देश में कई धर्म हैं और एनसीईआरटी का काम है कि बच्चों को सभी धर्मों के बारे में सिखाया जाए। पांच मूल्य हैं- सच्चाई, शांति, अहिंसा, प्रेम और धार्मिक आचरण। किसी भी धर्म को इसे लेकर कोई परेशानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि इससे अच्छा तो कुछ हो ही नहीं सकता है। मैं जब डायरेक्टर बना तो मैं ये कभी नहीं भूला कि यहां कोई इंसान मुझसे पहले बैठता था, जिसकी कोई विचारधारा नहीं थी, केवल मेरिट था। ऐसे ही एनसीईआरटी काम करता है। आलोचना हमारी मदद करती है।
–आईएएनएस
केके/एबीएम
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)



Download Android App
Download iOS App



