केरल में ‘इस्लाम-अनुकूल जिम’ को लेकर छिड़ी बहस

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पलक्कड़, 4 जून (आईएएनएस)। केरल के पलक्कड़ जिले के पुथुनगरम इलाके में एक फिटनेस सेंटर ने खुद को ‘इस्लाम-अनुकूल जिम’ में बदलने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई है। जिम प्रबंधन की ओर से यह घोषणा इंस्टाग्राम पर साझा की गई थी। पोस्ट में बताया गया कि पिछले 15 वर्षों से संचालित यह जिम अब शरिया आधारित दिशानिर्देशों के अनुसार काम करेगा। इसके लिए जिम में कुछ नए नियम लागू किए जाएंगे। घोषणा के अनुसार, जिम के अंदर संगीत बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके…

पलक्कड़, 4 जून (आईएएनएस)। केरल के पलक्कड़ जिले के पुथुनगरम इलाके में एक फिटनेस सेंटर ने खुद को ‘इस्लाम-अनुकूल जिम’ में बदलने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।

जिम प्रबंधन की ओर से यह घोषणा इंस्टाग्राम पर साझा की गई थी। पोस्ट में बताया गया कि पिछले 15 वर्षों से संचालित यह जिम अब शरिया आधारित दिशानिर्देशों के अनुसार काम करेगा। इसके लिए जिम में कुछ नए नियम लागू किए जाएंगे।

घोषणा के अनुसार, जिम के अंदर संगीत बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग समय तय किया जाएगा, ताकि दोनों एक साथ वर्कआउट न कर सकें। जिम में आने वाले लोगों के लिए ड्रेस कोड भी लागू किया जाएगा। इसके तहत सदस्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यायाम के दौरान उनके शरीर के वे हिस्से पूरी तरह ढके रहें, जिन्हें इस्लामी परंपराओं के अनुसार ढकना जरूरी माना जाता है।

जिम प्रबंधन का कहना है कि पुरुष और महिला सदस्य अलग-अलग समय पर ही व्यायाम करेंगे। वहीं महिला सदस्यों को ऐसे कपड़े पहनने होंगे जो धार्मिक मानकों के अनुसार उनके शरीर को पूरी तरह ढकें। कुछ रिपोर्टों में हिजाब पहनने की भी बात कही गई है।

प्रबंधन ने इस पहल को केरल का पहला ‘इस्लाम-अनुकूल जिम’ बताया है। हालांकि इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करने वाला कदम बताया, जबकि कई लोगों ने इस तरह की अलग व्यवस्था की जरूरत और उसके प्रभाव पर सवाल उठाए।

विवाद बढ़ने के बाद इंस्टाग्राम पर डाला गया मूल वीडियो हटा लिया गया। इसके बावजूद इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। जिम के मालिक और प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी कई जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।

कुछ लोगों ने यह चिंता भी जताई है कि भविष्य में इस तरह के केंद्र केवल फिटनेस गतिविधियों तक सीमित रहेंगे या उनमें अन्य प्रकार के प्रशिक्षण भी शामिल किए जा सकते हैं। फिलहाल यह मामला धार्मिक और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के आधार पर संचालित विशेष फिटनेस केंद्रों की भूमिका और उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।

–आईएएनएस

एसएचके/पीएम

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