‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम ‘पर संसद का 16-18 अप्रैल को विशेष सत्र, पीएम मोदी के पत्र पर खड़गे का जवाब, संसद का विशेष सत्र

Kharge Response on PM Letter

Kharge Response on PM Letter : महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बढ़ावा देने वाले नारी शक्ति अधिनियम को लागू करने को लेकर संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल के बीच आयोजित किया जाएगा। इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर इस चर्चा में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सभी दलों ने मिलकर इस कानून को पारित कराने में सहयोग दिया था।

पीएम के पत्र के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह कानून सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कांग्रेस ने इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी। खड़गे ने अपने पत्र में सवाल उठाया कि जब सभी दल इस कानून को तत्काल लागू करने के पक्ष में थे, तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्टता की मांग की है।

खरगे ने उठाए सवाल

बता दें प्रधानमंत्री मोदी के पत्र के जवाब में कांग्रेस नेता खरगे ने कहा कि तब से अब तक 30 महीने बीत चुके हैं और अब यह विशेष सत्र हमें भरोसे में लिए बिना बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि आपकी सरकार, होने वाले परिसीमन के बारे में कोई भी जानकारी दिए बिना, एक बार फिर हमसे सहयोग की अपेक्षा कर रही है. आप इस बात से सहमत होंगे कि परिसीमन और दूसरे पहलुओं की विस्तृत जानकारी के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा.

उन्होंने आगे कहा, आपने अपने पत्र में जिक्र किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद हो रहा है कि यह बात सच्चाई के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से लगातार यह आग्रह कर रहे थे कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा चुनावी दौर समाप्त होने के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा की जा सके.

उठाया नोटबंदी और जीएसटी का सवाल

खरगे ने भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया, उन्होंने कहा, खरगे ने कहा कि मुझे यह लिखते हुए भी दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी हो, GST हो, जनगणना हो, या फिर संघीय ढांचे से जुड़े मामले हों, जैसे कि वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना और करों का बंटवारा, किसी भी तरह का भरोसा नहीं जगाता.

खरगे ने कहा कि यदि इस विशेष सत्र का उद्देश्य, जैसा कि आपने अपने पत्र में लिखा है, हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना और सबको साथ लेकर, मिलकर आगे बढ़ना है, तो मेरा सुझाव है कि सरकार 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक बुलाए, ताकि परिसीमन के उस मुद्दे पर चर्चा की जा सके, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में किए जा रहे संशोधन से जोड़ा जा रहा है.

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