भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के पहले से जारी लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) मान्य रहेंगे और उन्हें रद्द नहीं किया जाएगा। यह निर्णय मानवाधिकार आधार पर लिया गया है, जिससे पाकिस्तानी हिंदुओं को राहत मिली है।
भारत सरकार के पाकिस्तान के नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित करने के निर्णय के बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पहले से जारी किए गए लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) पर लागू नहीं होगा। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि पाकिस्तानी हिंदू नागरिकों को पहले से जारी एलटीवी वीजा मान्य और प्रभावी बने रहेंगे। इन वीजा को रद्द करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। सरकार ने यह रुख मानवीय आधार पर अपनाया है, जो वर्षों से पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारत में शरण देने की नीति का हिस्सा है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद वीजा सेवाएं पूरी तरह से बंद किए जाने की घोषणा से भ्रम फैल गया था। इस भीषण हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 15 लोग घायल हुए थे।
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इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सभी मौजूदा वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए थे और नई वीजा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी थीं। हालांकि, विदेश मंत्रालय की इस ताजा स्पष्टता से हिंदू पाकिस्तानी नागरिकों और उनसे जुड़ी मानवाधिकार संस्थाओं को राहत मिली है, जो आशंका जता रही थीं कि एलटीवी रखने वाले लोग भी इस निलंबन के दायरे में आ जाएंगे।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने कहा कि सार्क वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पाकिस्तानी नागरिकों को पहले जारी किए गए किसी भी एसवीईएस वीजा को रद्द माना जाएगा। एसवीईएस वीजा के तहत भारत में मौजूद सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ना होगा। इसके साथ ही, नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित किया गया। बताया गया कि उन्हें एक सप्ताह के भीतर भारत छोड़ना होगा।


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