भोपाल, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी करार कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार देर रात आधिकारिक तौर पर आदेश जारी किया।
विधानसभा सचिवालय के राजपत्र में दतिया विधानसभा को रिक्त घोषित किया गया है। राजेंद्र भारती को फर्जीवाड़े के मामले में 3 साल की सजा सुनाई जाने के बाद विधिक नियमों के प्रावधान के तहत यह फैसला लिया गया।
आधिकारिक राजपत्र में लिखा है, “मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 22-दतिया से निर्वाचित सदस्य राजेंद्र भारती के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने निर्णय पारित किया है। अपराध सिद्ध होने के फलस्वरूप तीन साल के कारावास और 1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी गई है। उन्हें (राजेंद्र भारती) दंडित किए जाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (10 जुलाई 2013) के पालन में संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (सी) सहपठित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत राजेंद्र भारती 2 अप्रैल 2026 से विधानसभा की सदस्यता से निरर्हित हो गए हैं। अतः मध्यप्रदेश विधानसभा में एक स्थान रिक्त हो गया है।”
इससे पहले, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कोऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दतिया (मध्य प्रदेश) से कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने उनके सह आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी इतनी ही सजा सुनाई।
बुधवार को कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश रचने और धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों का दोषी पाया गया।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इसकी सुनवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। दरअसल, राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा व उनके परिवार के लोग इस मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजेंद्र भारती का यह भी कहना था कि अभियोजन पक्ष के अधिकारी भी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने मांग की थी कि मामले की सुनवाई ग्वालियर के बजाय किसी अन्य स्थान पर कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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