उज्जैन, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर मे बुधवार सुबह भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर महादेव जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
महाकाल की भस्म आरती मंदिर की सबसे खास और प्राचीन परंपरा है। यह आरती सुबह 4 बजे होती है। बुधवार को यह आरती और भी यादगार रही। भस्म की पवित्र राख, मंत्रों की गूंज और भक्तों के अटूट विश्वास ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया। भक्त दूर-दूर से पहुंचे थे। उन्होंने पूरी श्रद्धा से बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया।
भस्म आरती में भगवान को पवित्र भस्म चढ़ाई जाती है, जो उनके रुद्र रूप का प्रतीक है। सुबह का कार्यक्रम शुरू करने के लिए सबसे पहले बाबा के पट खोले गए और ब्रह्म मुहूर्त में महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया और बाद में पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिसमें वे सिर्फ भस्म से स्नान करते हैं।
आरती पूरी होने के बाद भगवान महाकाल का श्रृंगार किया गया। इस खास श्रृंगार में बाबा महाकाल ने सभी भक्तों को दर्शन दिए। श्रृंगार में फूलों, चंदन और अन्य पवित्र सामग्री से सजे भगवान का रूप देखते ही बनता था। बाबा के इस श्रृंगार के बाद कपूर की आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया।
महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना होने वाली भस्म आरती न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें भस्म का इस्तेमाल होता है, जो भोलेनाथ की शाश्वत शक्ति की याद दिलाता है।
–आईएएनएस
एनएस/पीएम
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