मणिपुर उच्च न्यायालय ने इंफाल स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) को 20 दिसंबर तक हलफनामा दाखिल कर वहां संस्थान में मूलभूत सुविधाओं को लेकर जो शिकायतें की गई हैं, उसका जवाब देने को कहा है। संस्थान में पोस्ट ग्रेजुएट के एक छात्र ने वहां उपकरणों की खराबी और लोगों को दवा समेत मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायतें लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी थीं।
उच्च न्यायालय की ओर से गठित एक कमेटी द्वारा मसले को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ख्वैरकपम नोबिन सिंह और न्यायमूर्ति एन. कोटेश्वर की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह निर्देश जारी किया। चूंकि यह बुनियादी स्वास्थ्य सेवा तंत्र से जुड़ा मसला था, इसलिए उच्च न्यायालय ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया था।
12 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने रिम्स प्राधिकार को यह निर्देश दिया था कि वह 15 दिसंबर तक इस संबंध में हलफनामा दाखिल करे। रिम्स के हलफनामा दाखिल करने में विफल रहने पर अदालत ने इसकी अवधि बढ़ा दी है। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के छात्रों के लिए वर्ष 1972 में रिम्स की स्थापना की गई थी, जो इस समय बदहाल बताया जा रहा है।
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