जेएनयू हिंसा पर ओवैसी समेत कई नेताओं ने की निंदा, जानिए किसने क्या कहा

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एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के बाद वहां के विद्यार्थियों के साथ सोमवार को एकजुटता व्यक्त की और कहा कि ‘क्रूर हमला’ विद्यार्थियों को दंडित करने के लिए है क्योंकि उन्होंने ‘उठ खड़े होने की जुर्रत’ की।

एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुई हिंसा के बाद वहां के विद्यार्थियों के साथ सोमवार को एकजुटता व्यक्त की और कहा कि ‘क्रूर हमला’ विद्यार्थियों को दंडित करने के लिए है क्योंकि उन्होंने ‘उठ खड़े होने की जुर्रत’ की। 
हैदराबाद के सांसद ने ट्वीट किया, ‘‘जेएनयू के बहादुर विद्यार्थियों के साथ एकजुटता के लिए । यह क्रूर हमला जेएनयू विद्यार्थियों को दंडित करने लिए है क्योंकि उन्होंने उठ खड़े होने की जुर्रत की। यह इतना बुरा है कि केंद्रीय मंत्री भी असहाय की तरह ट्वीट कर रहे हैं। मोदी सरकार को जवाब देना चाहिए कि कि पुलिसकर्मी गुंडों का पक्ष क्यों ले रहे हैं।’’ 
उनकी पार्टी एआईएमआईएम ने भी ट्वीट किया, ‘‘एआईएमआईएम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ खड़ा है। विद्यार्थियों की आवाज से कौन डरा महसूस कर रहा है?’’ रविवार रात को जेएनयू परिसर में घुस कर नकाबपोश व्यक्तियों ने लाठी-डंडों और छड़ों से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों पर हमला किया एवं संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। उसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा जिसने फ्लैग मार्च किया। 
विश्वविद्यालय परिसर में करीब दो घंटे तक अराजकता का माहौल रहा। इस हिंसा में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कम से कम 28 लोग घायल हो गये। जेएनयू हिंसा पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि नकाबपोश लोगों को कैंपस में कैसे घुसने दिया गया। वाइस चांसलर ने क्या किया और पुलिस क्यों मूकदर्शक बनकर खड़ी रही। 
वहीँ, जेएनयू हिंसा पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने जेएनयू कैंपस में छात्राओं पर हमले को लेकर पुलिस को समन जारी किया है।
ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने नयी दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए हमले की सोमवार को निंदा करते हुए घटना पर हैरानी जताई है।
 पटनायक ने ट्वीट किया, ‘‘जेएनयू में हिंसक हमले की सूचना से सकते में हूं। लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और छात्रों पर ऐसे हमलों की एक आवाज में निंदा की जानी चाहिए।’’ 

Desk Team