भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि पीओके को खाली करें और आतंकवादियों को सौंपें। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते। भारत का रुख स्पष्ट है कि द्विपक्षीय चर्चा तभी संभव होगी जब पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन बंद करेगा।
भारत पाकिस्तान के बीच विवाद के बाद भारत ने कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी है। इसी बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय चर्चा पर भारत के रुख को दोहराया है, जिसमें कहा गया है कि दोनों देशों के बीच चर्चा के लिए एकमात्र क्षेत्र पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को सौंपना और जम्मू-कश्मीर के अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्र को खाली करना है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हमारा रुख स्पष्ट है। कोई भी जुड़ाव द्विपक्षीय होना चाहिए। हम दोहराना चाहेंगे कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को आतंकवादियों के रिकॉर्ड और सूची कुछ सालों पहले ही भेजी थी, पाकिस्तान को उन्हें भारत को सौंपने की जरूरत है।
#WATCH दिल्ली: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “… जहां तक पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हमारा रुख स्पष्ट है। कोई भी संबंध द्विपक्षीय होना चाहिए। हम दोहराना चाहेंगे कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्हें भारत को उन कुख्यात आतंकवादियों को… pic.twitter.com/zNVn0EOM1t
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 29, 2025
POK खाली करे पाकिस्तान
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर बातचीत तभी होगी जब पीओके खाली हो जाएगा और पाकिस्तान हमें यह इलाका सौंप देगा। जहां तक सिंधु जल संधि का सवाल है, यह तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देने से पूरी तरह से इनकार नहीं कर देता। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट करते हुए बताया कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते और पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते।
आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते
बता दें कि इससे पहले PM नरेंद्र मोदी ने 12 मई को देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि जिस तरह से पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तान सरकार आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है, वह एक दिन पाकिस्तान को तबाह कर देगी। अगर पाकिस्तान को बचना है तो उसे अपने आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा। शांति के लिए कोई और रास्ता नहीं है। भारत का रुख बिल्कुल साफ है… आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।


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