मध्य प्रदेश: किसानों के लिए वरदान साबित हो रही पीएम किसान सम्मान निधि योजना

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मंडला, 26 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। यह योजना किसानों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसका सीधा लाभ अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। जिले के हजारों किसान इस योजना के तहत मिलने वाली राशि से अपनी खेती और आजीविका को मजबूत बना रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को साल में तीन किस्तों में आर्थिक सहायता दी जाती है। प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में…

मंडला, 26 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। यह योजना किसानों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसका सीधा लाभ अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। जिले के हजारों किसान इस योजना के तहत मिलने वाली राशि से अपनी खेती और आजीविका को मजबूत बना रहे हैं।

इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को साल में तीन किस्तों में आर्थिक सहायता दी जाती है। प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर किए जाते हैं। इस तरह किसानों को सालाना कुल 6,000 रुपए की मदद मिलती है।

मंडला जिले के किसानों का कहना है कि सरकार से मिलने वाली यह आर्थिक मदद उनके लिए किसी संबल से कम नहीं है। इससे खेती में सहूलियत मिलती है और छोटे-छोटे खर्चों की चिंता कम हो जाती है। हालांकि अभी भी कुछ किसान ऐसे हैं जो इस योजना के लाभ से वंचित हैं। इसके पीछे मुख्य वजह दस्तावेजों की कमी, आधार लिंक न होना और पंजीयन में त्रुटियां बताई जा रही हैं। प्रशासन इन समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंच सके।

कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी नारायण प्रसाद धुर्वे ने आईएएनएस से बताया कि वर्तमान में कृषि विभाग के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो रही हैं।

उन्होंनेबताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ई-कृषि अनुदान पोर्टल के माध्यम से किसान आवेदन करते हैं। आवेदन के बाद डीलर द्वारा दिए गए कृषि यंत्रों का भौतिक सत्यापन किया जाता है। क्षेत्रीय अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर जांच करते हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब जियो टैगिंग की व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे लोकेशन के जरिए सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके। इससे योजनाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है।

जिले के किसान मन्नू ठाकुर ने बताया कि वे एक छोटे किसान हैं और उनके पास करीब 2.5 एकड़ जमीन है। वे गेहूं, धान और मक्का की खेती करते हैं और अपनी उपज को मंडी में बेचते हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अच्छा लाभ मिलता है। साथ ही किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली 2,000 रुपए की किस्त भी उनके लिए काफी मददगार साबित होती है, जिससे खेती के खर्चों में राहत मिलती है।

वहीं, किसान अनुराग ठाकुर ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए बताया कि वे पिछले 15-20 साल से खेती कर रहे हैं और किसान परिवार से हैं। उनके पास 7-8 एकड़ जमीन है, लेकिन अभी तक उन्हें किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पाया है। वे धान, मक्का और गेहूं की खेती करते हैं, लेकिन मक्का पर समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि किसान कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे खाद और पानी की कमी, जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है।

–आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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