Maharashtra News : महाराष्ट्र सरकार मुंबई में ऑटो चालकों के लिए अनिवार्य मराठी भाषा का नियम लेकर आई है जिसके बाद से मुंबई में इसके खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। मुंबई में गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा लागू किए इस नियम के विरोध में सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल की शुरुआत कर दी है।
चालकों का आरोप है कि इस नियम की आड़ में उन्हें परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मुंबई के कई हिस्सों में मराठी भाषा में पर्याप्त पकड़ न होने के नाम पर आरटीओ द्वारा की जा रही दंडात्मक कार्रवाई और क्षेत्रीय अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
चालकों ने किया रास्ता रोको आंदोलन
सोमवार सुबह व्यस्त समय के दौरान कांदिवली लिंक रोड पर लालजीपाड़ा के पास दर्जनों चालकों ने ‘रास्ता-रोको’ प्रदर्शन किया, जिससे सड़क पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया और पुलिस बल तैनात करना पड़ा। इसके अलावा लोखंडवाला और दहानुकरवाड़ी जैसे उपनगरीय इलाकों में भी चालकों ने काम ठप रखा।
चालकों ने बताया कि उनमें से कई लोग 55-60 वर्ष के हैं और पिछले कई दशकों से मुंबई में रहकर ऑटो चला रहे हैं। उनका कहना है कि वे रोजाना के कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझते और बोलते हैं, लेकिन पढ़े-लिखे न होने के कारण उन पर सख्त भाषा नियम थोपना अनुचित है।
क्या है भाषा का नियम
बता दें, महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा, पारंपरिक टैक्सियों और ओला-उबर जैसी ऐप-आधारित कैब के सभी कमर्शियल चालकों के लिए मराठी भाषा का कामचलाऊ ज्ञान अनिवार्य कर दिया है।
इस नियम के तहत चालकों को यात्रियों से सामान्य बातचीत, किराया पूछने और दिशा-निर्देश समझने जैसी व्यावहारिक मराठी आनी चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के फैसले के अनुसार, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट केवल उन्हीं आवेदकों को जारी किए जाएंगे जो मराठी पढ़ और बोल सकते हैं। हालांकि, यूनियनों का कहना है कि इस शर्त से हजारों चालकों की रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
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