राष्ट्रीय लोक अदालत में 2,84,14,329 मामलों का निपटारा, आम लोगों को आसान और सस्ता न्याय देने का मंच

Summary :

NALSA Settles Legal Cases: नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की पहल पर 14 मार्च 2026 को साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। इस दौरान देशभर में बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया। आंकड़ों के अनुसार, इस लोक अदालत में कुल 2,84,14,329 मामलों को सुलझाया गया। इनमें 2,57,82,254 प्री-लिटिगेशन (मुकदमा दर्ज होने से पहले के मामले) और 26,32,075 लंबित मामले शामिल थे। इन मामलों के समाधान के साथ ही लगभग ₹10,920.47 करोड़ की राशि से जुड़े विवाद भी निपटाए गए। Moto Accident Claims: सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन लाइव ला के अनुसार, राष्ट्रीय लोक…

NALSA Settles Legal Cases: नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की पहल पर 14 मार्च 2026 को साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। इस दौरान देशभर में बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया।

आंकड़ों के अनुसार, इस लोक अदालत में कुल 2,84,14,329 मामलों को सुलझाया गया। इनमें 2,57,82,254 प्री-लिटिगेशन (मुकदमा दर्ज होने से पहले के मामले) और 26,32,075 लंबित मामले शामिल थे। इन मामलों के समाधान के साथ ही लगभग ₹10,920.47 करोड़ की राशि से जुड़े विवाद भी निपटाए गए।

Moto Accident Claims: सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

NALSA Settles Legal Cases
NALSA Settles Legal Cases (Source: Social Media)

लाइव ला के अनुसार, राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन भारत के मुख्य न्यायाधीश और नालसा के संरक्षक-प्रमुख Justice Surya Kant तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष Justice विक्रम नाथ के मार्गदर्शन में किया गया।

यह आयोजन देश के 26 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में किया गया। इसके लिए उच्च न्यायालयों, जिला अदालतों, ट्रिब्यूनलों, उपभोक्ता मंचों और स्थायी लोक अदालतों में हजारों पीठों का गठन किया गया था।

कई तरह के मामलों की हुई सुनवाई

Moto Accident Claims (Source: Social Media)
Moto Accident Claims (Source: Social Media)

लोक अदालत में अलग-अलग तरह के दीवानी और आपराधिक शमनीय मामलों को शामिल किया गया। इनमें बैंक वसूली, चेक बाउंस, सेवा और पेंशन से जुड़े विवाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा दावे, ट्रैफिक चालान और वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर) जैसे मामले शामिल थे।

इसके अलावा श्रम विवाद, उपभोक्ता मामले, भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद, बिजली-पानी और टेलीफोन बिल से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई की गई।

आसान और सस्ता न्याय देने का मंच

नालसा के मुताबिक, लोक अदालत विवादों को सुलझाने का एक प्रभावी वैकल्पिक तरीका है। यहां दोनों पक्ष आपसी सहमति से कम समय और कम खर्च में अपने मामलों का समाधान निकाल सकते हैं। लोक अदालत के फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं। साथ ही, इसमें अदालत में जमा की गई फीस भी पूरी तरह वापस कर दी जाती है। नालसा का कहना है कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को न्याय तक आसान पहुंच देना और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना है, ताकि नागरिकों को जल्दी और सुलभ न्याय मिल सके।

यह भी पढ़ें – घरेलू एयरलाइंस ने मध्य पूर्व क्षेत्र की कई उड़ानों को रद्द किया

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।