नासा ने दिखाई गैलेक्सी एम-77 की तीन आश्चर्यजनक तस्वीरें, दिखी ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ की झलक

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नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से गैलेक्सी एम-77 की तीन शानदार तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में गैलेक्सी का केंद्र इतनी तेजी से चमक रहा है कि पूरी गैलेक्सी चमकती नजर आ रही है। सबसे खास बात इन तस्वीरों में दिखने वाले ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ हैं, जो टेलीस्कोप के ऑप्टिक्स की वजह से बनने वाला एक ऑप्टिकल प्रभाव है। ये डिफ्रैक्शन स्पाइक्स कोई गैलेक्सी की असली संरचना नहीं बल्कि टेलीस्कोप का ऑप्टिकल प्रभाव है। गैलेक्सी एम-77 सर्पिल गैलेक्सी है और सक्रिय केंद्र वाली गैलेक्सियों में से एक है। नासा…

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से गैलेक्सी एम-77 की तीन शानदार तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में गैलेक्सी का केंद्र इतनी तेजी से चमक रहा है कि पूरी गैलेक्सी चमकती नजर आ रही है। सबसे खास बात इन तस्वीरों में दिखने वाले ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ हैं, जो टेलीस्कोप के ऑप्टिक्स की वजह से बनने वाला एक ऑप्टिकल प्रभाव है।

ये डिफ्रैक्शन स्पाइक्स कोई गैलेक्सी की असली संरचना नहीं बल्कि टेलीस्कोप का ऑप्टिकल प्रभाव है। गैलेक्सी एम-77 सर्पिल गैलेक्सी है और सक्रिय केंद्र वाली गैलेक्सियों में से एक है। नासा की इन तस्वीरों से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के आसपास की गतिविधि, नए तारों के निर्माण और गैलेक्सी की संरचना को बेहतर समझने में मदद मिलेगी।

नासा ने इन तस्वीरों के साथ लिखा, “किसी को भी अपनी चमक कम न करने दें।” गैलेक्सी एम-77 का केंद्र इतना चमकदार है क्योंकि गैस उसके केंद्रीय ब्लैक होल के चारों ओर बहुत तेज गति से घूम रही है। इस तेज घुमाव से गैस गर्म हो जाती है और भारी मात्रा में ऊर्जा व रेडिएशन निकालती है।

पहली तस्वीर-मिड-इन्फ्रारेड व्यू है। इस तस्वीर में गैलेक्सी के केंद्र से निकलने वाली तेज चमक सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। केंद्र से छह बड़ी और दो छोटी चमकदार नारंगी किरणें बाहर की ओर निकल रही हैं। ये किरणें असल में ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ हैं, जो वेब टेलीस्कोप की बनावट के कारण पैदा होते हैं। गैलेक्सी की सर्पिल भुजाओं में नारंगी रंग के चमकते बुलबुले दिख रहे हैं, जो नए बने तारों के समूह या स्टार क्लस्टर्स हैं। गैलेक्सी का बाकी हिस्सा धूल के नीले घूमते बादलों से भरा दिख रहा है।

वहीं, दूसरी तस्वीर नियर-इन्फ्रारेड व्यू है, जिसमें गैलेक्सी के केंद्र में 6 हजार प्रकाश वर्ष लंबा एक ‘बार’ (बार संरचना) साफ दिख रहा है। यह बार एक चमकदार छल्ले से घिरा हुआ है, जिसे ‘स्टारबर्स्ट रिंग’ कहा जाता है। यह छल्ला गैलेक्सी की दो सर्पिल भुजाओं के अंदरूनी सिरों से बनता है। स्टारबर्स्ट क्षेत्र वे जगहें हैं जहां नए तारे बहुत तेजी से बन रहे हैं। यहां भी केंद्र से छह लंबी चमकदार किरणें यानी डिफ्रैक्शन स्पाइक्स निकल रही हैं।

तीसरी तस्वीर दोनों इन्फ्रारेड व्यूज का कॉम्बिनेशन हैं। यह तस्वीर मिड-इन्फ्रारेड और नियर-इन्फ्रारेड दोनों को मिलाकर बनाई गई है। इसमें गैलेक्सी की पूरी खूबसूरती और वैज्ञानिक महत्व एक साथ दिख रहा है। केंद्र से निकलने वाले डिफ्रैक्शन स्पाइक्स, स्टारबर्स्ट रिंग, सर्पिल भुजाएं और धूल के बादल सभी स्पष्ट नजर आ रहे हैं। वेब टेलीस्कोप की बनावट की वजह से चमकदार वस्तुओं के चारों ओर छह-प्लस-दो बिंदुओं वाला पैटर्न बनता है जबकि हबल टेलीस्कोप में चार बिंदुओं वाला पैटर्न दिखता है।

–आईएएनएस

एमटी/पीएम

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