कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बृहस्पतिवार को कहा कि दलहन उत्पादन में प्राप्त आत्मनिर्भरता को तिलहन में भी दोहराया जाना चाहिए ताकि देश खाद्य तेलों का आयात घटा सके। देश के प्रमुख शोध संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 92वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने, स्वस्थ खाद्य पदार्थों के उत्पादन को बढ़ाने तथा दालों और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने की भी जरूरत है।
तोमर के हवाले से एक सरकारी बयान में कहा गया, पामतेल उत्पादन को अनुसंधान और खेती रकबे का विस्तार कर बढ़ाने की जरूरत है। तिलहन की नई किस्मों को विकसित करने पर जोर देते हुए, तोमर ने कहा कि दालों के उत्पादन में प्राप्त आत्मनिर्भरता को तिलहन उत्पादन के मामले में भी दोहराया जाना चाहिए ताकि खाद्य तेलों का आयात कम हो।
कच्चे तेल और सोने के बाद भारत में तीसरे स्थान पर सबसे अधिक आयात खाद्य तेल का होता है। मंत्री ने आगे कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित कृषि सुधारों की घोषणा हाल ही में की गई है, जो किसानों को सशक्त बनाएंगे और उन्हें उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य दिलाने में मदद करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों को यह भी सुनिश्चित करना है कि ठेका खेती का लाभ छोटे किसानों तक पहुंचे। देश के कृषि क्षेत्र में आईसीएआर के योगदान की सराहना करते हुए, तोमर ने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसंधान योगदान और किसानों की कड़ी मेहनत के कारण भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में अधिशेष उत्पादन करने वाला देश बना है।
उन्होंने कोरोनोवायरस की वजह से लागू किये गये लॉकडाउन के दौरान भी फसलों के रिकॉर्ड उत्पादन के लिए कृषक समुदाय को बधाई दी। मंत्री ने आठ नए उत्पाद और 10 प्रकाशन भी जारी किए। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला और कैलाश चौधरी, आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र के अलावा कृषि-वैज्ञानिक और अधिकारी इस वर्चुटल कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर, आईसीएआर ने वर्ष 2019 के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संस्थानों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, किसानों और कृषि पत्रकारों को पुरस्कार दिए। जुलाई 1929 में स्थापित आईसीएआर, देश में बागवानी, मत्स्य पालन और पशु विज्ञान सहित कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षा के समन्वय, मार्गदर्शन और प्रबंधन करने वाली सर्वोच्च निकाय है। देश भर में फैले 102 आईसीएआर संस्थानों और 71 कृषि विश्वविद्यालयों के साथ, यह दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि प्रणालियों में से एक है।


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