NITI Aayog : नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने मंगलवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी की। इस मौके पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह रिपोर्ट पंचायती राज मंत्रालय के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (एनआईआरडी व पीआर) ने तैयार की है।
रिपोर्ट का मकसद ग्राम सभा की बैठकों में लोगों की भागीदारी पर असर डालने वाले कारकों का पता लगाना और जमीनी स्तर पर शासन में नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने के उपाय खोजना है। दो हिस्सों वाली यह रिपोर्ट ग्राम सभाओं में असरदार भागीदारी में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करती है और सबूतों पर आधारित नीतिगत सुझाव और रणनीतिक दिशा-निर्देश देती है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि ग्राम सभा भारत में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र का सबसे सच्चा रूप है और इसकी सक्रियता ही यह तय करती है कि शासन का फायदा आखिरी व्यक्ति तक कितनी अच्छी तरह पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट सबूतों पर आधारित जानकारी और समाधान-केंद्रित ढांचा देती है जिसे पूरे देश में असरदार ढंग से अपनाया जा सकता है।
वहीं, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि मंत्रालय रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि ग्राम सभाओं को ज्यादा समावेशी, भागीदारी-पूर्ण और परिणाम-उन्मुख बनाया जा सके। गौरतलब है कि रिपोर्ट में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (जिनमें 213 जिले, पेसा और महिलाओं के अनुकूल ग्राम पंचायतें शामिल हैं) की लगभग 400 ग्राम पंचायतों के करीब 7,800 लोगों को शामिल किया गया।
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