नीतीश के विश्वसनीय सहयोगी होने का बिजेंद्र यादव को मिला इनाम

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पटना, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार में सम्राट चौधरी के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में बिजेंद्र प्रसाद यादव भी शामिल हैं। भाजपा के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। इस बड़ी जिम्मेदारी मिलने को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के विश्वासी सहयोगी होने का बिजेंद्र यादव को इनाम मिला है। दरअसल, नीतीश कुमार एनडीए की सरकार का नेतृत्व कर रहे हों या महागठबंधन की सरकार का, उनके मंत्रिमंडल में बिजेंद्र प्रसाद यादव शामिल रहे हैं। वे 2005 से लगातार मंत्री हैं। सुपौल जिले के मुरली के रहने वाले बिजेंद्र…

पटना, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार में सम्राट चौधरी के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में बिजेंद्र प्रसाद यादव भी शामिल हैं। भाजपा के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। इस बड़ी जिम्मेदारी मिलने को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के विश्वासी सहयोगी होने का बिजेंद्र यादव को इनाम मिला है।

दरअसल, नीतीश कुमार एनडीए की सरकार का नेतृत्व कर रहे हों या महागठबंधन की सरकार का, उनके मंत्रिमंडल में बिजेंद्र प्रसाद यादव शामिल रहे हैं। वे 2005 से लगातार मंत्री हैं। सुपौल जिले के मुरली के रहने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव स्व. सुखराम यादव के पुत्र हैं। उनके पिता स्वयं मुखिया थे। राजद सरकार में भी वे मंत्री रहे हैं।

सबसे गौर करने वाली बात है कि बिजेंद्र यादव अधिकांश समय तक ऊर्जा मंत्रालय का पद संभाल चुके हैं। उनके मंत्री रहते हर घर में बिजली का अभियान चला और यह सफल भी रहा, जबकि उनके काल में ही बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है।

पिछले नीतीश मंत्रिमंडल में वे ऊर्जा के अलावा योजना एवं विकास विभाग, वित्त एवं वाणिज्यकर, मद्यनिषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में भी उन्हें बड़ा विभाग मिलने की संभावना है। वे विधानसभा में सुपौल का नेतृत्व करते हैं। वे पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में नौवीं बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

वे कोसी इलाके के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। जेपी आंदोलन से राजनीति में आए बिजेंद्र यादव ने 1990 में पहली बार जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के प्रमोद कुमार सिंह को हराकर विधानसभा पहुंचे थे। नीतीश का भरोसा उन पर लगातार मजबूत होता गया। ऐसे में माना जा रहा है कि यही भरोसा उनके राजनीतिक कद को बढ़ाता रहा।

–आईएएनएस

एमएनपी/एएस

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